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पीढ़ी दर पीढ़ी पारंपरिक बाजा के साथ निभाते आ रहे हैं, नवाखाई की परंपरा-कुंजाम परिवार

मुड़ागाँव (कोरासी) आदिवासी गोंड समाज की एक विशेष नवाखाई हैं, जो आज ग्राम मुड़ागाँव में रेखराम ध्रुव (आदिवासी युवा प्रभाग सदस्य)गोत्र कुंजाम परिवार में विशेष पारंपरिक बाजा के साथ त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। कुंजाम परिवार में अलग ही पारंपरिक बाजा के साथ नवाखाई को मनाते है।

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नवाखाई के दिन समस्त परिवार में एकजुटता दिखाते हुए, एक साथ साजा का पत्ता कोरिया का पत्ता में नए धान के बीज जिसे चिवड़ा कहते हैं, चिवड़ा, दूध, नारियल इसे प्रसाद के रूप में अपने इष्ट बड़ा देव दूल्हा देव देवताओं एवं कुलदेवी तथा अपने पूर्वजों को अर्पित कर पूरा परिवार एक साथ इस पर्व को मनाया जाता है।

इस दिन भोजन प्रसाद को पूरा परिवार एक साथ साजा और कोरिया के पत्ता पर ही ग्रहण करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गोंड आदिवासी लोग साजा के पेड़ को भगवान मानते हैं। समस्त परिवार सामूहिक भोजन के पश्चात परिवार के सभी सदस्य बड़े बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लेते हैं, और एक दूसरे में प्रेम स्नेह बांटते हैं, और अपने इष्ट देव को गली भ्रमण कर वापस घर लाते हैं।

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