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नि:शुल्क सरस्वती सायकल योजना ठंडे बस्ते में – विभा साहू

डोंगरगांव विधानसभा अंतर्गत जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 5 अर्जुनी की जिला पंचायत सदस्य श्रीमती विभा साहू ने आज क्षेत्र के विभिन्न उच्च माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ जनपद सदस्य रवि साहू, रेशमा साहू, सरपंच ज्योति साहू, डीकेश्वरी साहू, गिरधारी साहू और रेखा बघेल उपस्थित रहे।

निरीक्षण के दौरान विभा साहू ने नि:शुल्क सरस्वती सायकल योजना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि—

> “ज़िले के कुल 6,422 पंजीकृत नवमीं कक्षा की अनुसूचित जाति, जनजाति और BPL छात्राओं को सायकल जून माह के अंत तक मिल जानी चाहिए थी, लेकिन आज तक वितरण नहीं हुआ। सरकार ने सायकल ख़रीदी की प्रक्रिया को केंद्रीकृत कर जिला शिक्षा विभाग के अधिकारों का हनन किया है।”

उन्होंने आशंका जाहिर की कि यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकती है, क्योंकि अभी तक प्रदेश स्तर पर सायकलें खरीदी ही नहीं गई हैं।
विद्यालयों की जमीनी हकीकत उजागर

निरीक्षण के दौरान श्रीमती साहू को कई स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी नजर आई। विशेष
खुज्जी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में बीचोंबीच लगा विद्युत पोल, जो गंभीर हादसों को न्योता दे सकता है।

“शिक्षकों द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद भी बिजली विभाग ने पोल का स्थानांतरण नहीं किया,” उन्होंने कहा।
बडगांव चारभाटा में संस्कृत शिक्षक की कमी, जबकि नवमीं और दसवीं की कक्षाएं संचालित हैं।
खुर्सीपार हाई स्कूल में सामाजिक विज्ञान व्याख्याता, विज्ञान सहायक शिक्षक और प्राचार्य के पद रिक्त हैं।

किरगी उच्चतर माध्यमिक शाला में पुराने सेटअप के अनुसार शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि अब यहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक कला, विज्ञान और कॉमर्स तीनों संकाय संचालित हैं। गणित, अंग्रेज़ी, हिन्दी, सामाजिक विज्ञान के व्याख्याताओं के साथ-साथ प्राचार्य और दो भृत्य के पद रिक्त हैं।

करमतरा किसान शाला में चार चपरासी के पद लंबे समय से रिक्त हैं।
छात्राओं ने उठाई महिला स्वच्छता की समस्याएं
किरगी स्कूल की छात्राओं ने बताया कि बारिश में शौचालय तक पहुंचने में दिक्कत होती है और स्कूल में सैनिटरी पैड मशीन भी नहीं है।
करमतरा स्कूल में भी यह मशीन कई वर्षों से बंद पड़ी है।

श्रीमती विभा साहू ने कहा कि:
“शालाओं में भवन, शुद्ध पेयजल, पुस्तकालय, स्वच्छता, प्रयोगशाला, खेल मैदान, बाउंड्रीवॉल और शिक्षकों की पूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।”

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