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सरपंच, उपसरपंच, सचिव व ग्रामीणों के बीच जमकर विवाद; लटका ताला…जाने क्यों

✍️जिला संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद 

गरियाबंद- जिला समीप अंतर्गत ग्राम पंचायत मालगांव में आयोजित विशेष ग्रामसभा हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक में हिसाब किताब को लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, उपसरपंच और ग्रामीणों के बीच जमकर विवाद हुआ। ग्रामीण पंचायत में हुए विकास कार्यों का हिसाब किताब जानना चाहते थे लेकिन सरपंच सचिव और उपसरपंच टालमटोल करते रहे परंतु जब ग्रामीणों ने हंगामा शुरू किया तो तीनों ग्राम सभा को छोड़ कर भाग निकले। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने पंचायत भवन में ताला जड़ दिया। ज्ञात हो कि इसके पहले भी बीते 2 अक्टूबर की आयोजित ग्राम सभा का पंचायत प्रतिनिधियों के अनुपस्थिति के कारण बहिष्कार कर दिया था।

यहां ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवम विधायक शुक्ल के करीबी हाफिज खान उपसरपंच है जो पिछले बैठक में नदारत थे उल्लेखनीय है की राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जयंती के अवसर पर दो अक्टूबर से आठ अक्टूबर तक ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्राम पंचायत में विकास योजना तैयार करने के साथ ही बीते 6 महीनों में ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों का लेखा-जोखा ग्रामीणों के बीच रखना हैं ताकि पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता आ सके। परंतु जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत मालगांव में आयोजित ग्रामसभा में यहां के सरपंच सचिव और उपसरपंच खानापूर्ति करने में लगे हुए थे।

पंचायत के कार्यों के लेखा जोखा सही तरीके के बताने के बजाय ग्रामीणों से ही उलझ गए। सुबह 11:30 बजे ग्रामसभा की शुरुवात हुई। सबसे पहले सचिव गोविंद सेन ने पटल में तिमाही आय व्यव की जानकारी दी परंतु व्यय से सम्बन्धित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए।यही से विवाद शुरू हो गया। ग्रामीणों आय व्यय की जानकारी देने के बाद रोजगार गारंटी योजना चारागाह में फेसिंग पोल के बिल भुगतान की रसीद तथा 15वे वित्त (मूलभूत) से व्यय की गई राशि के भुगतान के बाउचर और दोनो कार्य के पंचायत प्रस्ताव को कापी देखनी चाही। लेकिन सचिव ने प्रस्तुत नहीं किया। करीब एक लाख रुपए से अधिक के भुगतान सरपंच सचिव ने बिना प्रस्ताव के ही कर दिए।

इन सभी विषयों को लेकर ग्रामीणों और पंचायत जनप्रतिनिधियों के बीच जमकर कहासुनी हुई ग्रामीणों ने पंचायत जनप्रतिनिधियों पर भ्रष्टाचार और सरकारी राशि के बंदरबांट के आरोप लगाते हुए नारेबाजी हंगामा शुरू कर दिया। कुछ देर बाद सरपंच, सचिव और उपसरपंच एक एक कर ग्राम सभा से भाग निकले पहले उपसरपंच हाफिज खान निकले, उसके बाद सचिव गोविंद सेन भी निकल गया। कुछ देर बाद सरपंच भी सभा से निकल गई। इधर, तीनो को भागते देख ग्रामीणों का आक्रोश काफी बढ़ गया। अभी कुछ देर देखने के बाद ग्रामीणों ने अंततः पंचायत भवन में ही ताला जड़ दिया।

इस दौरान प्रमुख रूप से भीम निषाद, सलीम खान, सालिक निषाद, रहीम खान, जनक सिन्हा, दुर्गेश यादव, लेखराज देवांगन, रामभगत निषाद, सुखन निषाद, दिलीप निषाद, हेमलाल यादव, हितेश ध्रुव, संदीप निर्मलकर धरमु निषाद, भुनेश्वर निषाद, मिलेश निषाद, रेखु ध्रुव, रूपलाल निषाद, फारुख चौधरी, परस सिन्हा, करीम खान, हेमलाल ध्रुव, ईश्वरी कुंजाम, हरि निषाद अमृतलाल निषाद, महेंद्र निषाद, ईश्वर निषाद, गालेश ध्रुव, रवि सिन्हा टीकू सिन्हा, सुरेश सिन्हा, रोहित सिन्हा, कुंजू निषाद, अशोक ध्रुव, राधे ध्रुव, चितेश निषाद, गणेश निषाद, मोहन निषाद, उदेराम निषाद सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

बताना लाजमी है कि ग्राम पंचायत माल गांव में आयोजित ग्राम सभा हर बार विवादों में घिर जाती है। कभी यहां के जिम्मेदार पंचायत प्रतिनिधि बैठक से नदारत रहते है तो कभी जानकारी देने से भागते हैं। इसके चलते हर बार यहां कुछ न कुछ विवाद जरूर होता है। इसके बाद भी यहां के पंचायत प्रतिनिधि बाज़ नही आते है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच और उपसरपंच मिलकर पंचायत में मनमर्जी चलाते है, पंचायत में उपसरपंच की धौंस है, सब काम उनके मुताबिक ही होते है, उपसरपंच ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी है इसके चलते शिकायत सामने आती है तो सत्ता के दबाव में कार्यवाही नहीं होती है।

पंचायत जनप्रतिनिधि शासन से मिलने वाली राशि का जमकर बंदरबांट करते हैं, अपने मनमाफिक तरीके से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वन करते हैं जिसके चलते जब हिसाब किताब की बारी आती है तो यह लोग दुम दबाकर ग्राम सभा से भाग जाते हैं। जिसके चलते ग्रामीण सभा का बहिष्कार कर देते है।

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