राजनांदगांव : आज 02 मई को पुलिस उप महानिरीक्षक एवं छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 14वीं वाहिनी धनोरा बालोद के सेनानी श्री डीआर आचला के 30 अपै्रल को अर्द्धवार्षिकी आयु पूरा करने के पश्चात् बुधवार 01 मई को 14वीं वाहिनी धनोरा के परिसर में आयोजित विदाई समारोह में उन्हें विदाई दी गई।
इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने श्री आचला के शून्य से शिखर तक के यात्रा की प्रसंशा करते हुए उनके कार्यों, व्यवहार एवं उपलब्धियों की भूरी-भूरी सराहना की। उल्लेखनीय है कि श्री आचला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चैकी के सुदूर वनांचल एवं उस जमाने के अत्यंत दूर्गम एवं सुविधाविहीन ग्राम टोहे के मूल निवासी है। उन्होंने घोर गरीबी एवं अपने पिता के निधन हो जाने के कारण केवल 8वीं कक्षा की पढ़ाई नियमित विद्यार्थी के रूप में की है। इसके पश्चात् वे तमाम अभाव से संघर्ष करते हुए एक स्वाध्यायी छात्र के रूप में आगे की पढ़ाई की है। वे हायर सेकण्डरी परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् 1988 में सहायक शिक्षक के पद पर मानपुर विकासखण्ड के रूप में नियुक्त हुए थे।
आपको बतादें कि श्री आचला बचपने से ही अत्यंत मेधावी एवं कुशाग्र बुद्धि के थे। वे 1992 में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से डीएसपी के पद पर चयनित होकर कई जिलों के एडिसनल् एसपी, एसपी फिर डीआईजी के पद पर पदोन्नत हुए हैं।
वही विदाई समारोह में उप पुलिस महानिरीक्षक कांकेर श्री शंकर बघेल, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 8वीं वाहिनी राजनांदगांव के सेनानी श्री बीपीएस राजभानू, पुलिस अधीक्षक एंटी करप्शन ब्यूरो श्री गोवर्धन ठाकुर एवं श्री तिलकराम कोसमा, सेनानी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल करकाभाट बालोद श्री एसआर सलाम, पुलिस अधीक्षक बालोद श्री सूरजन राम भगत, मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग श्री जीएस मण्डावी, एडीशनल एसपी बालोद श्री अशोक जोशी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल 14वीं वाहिनी धनोरा बालोद के उप सेनानी डाॅ. संगीता माहिलकर, जनसंपर्क अधिकारी बालोद श्री चंद्रेश ठाकुर, सहायक खाद्य अधिकारी श्री धरमू किरंगे सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्य गण उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ अधिकारियों एवं लोगों ने श्री आचला को वनांचल एवं छत्तीसगढ़ी महतारी के अनमोल हीरा बताते हुए उनके प्रतिभा, कार्योंं एवं व्यवहार को विलक्षण एवं अद्वितीय बताया। उन्होंने कहा कि श्री आचला तमाम अभावों, विपरित परिस्थितियों के बावजूद अपने अदम्य् इच्छा शक्ति, कठिन संघर्ष तथा अपने मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत व्यक्तित्व के कारण गांव के माटी से निकलकर माथे का चंदन बने है।
