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डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “समर्थ स्वास्थ्य के आधार पर ही समर्थ व सशक्त राष्ट्र सम्भव”।

Cg24News-R :- समर्थ स्वास्थ्य के आधार पर ही परिवार व समस्त राष्ट्र समर्थ बनता है। हमारी संस्कृति में आरोग्य या उत्तम स्वास्थ्य को धर्म अर्थ काम और मोक्ष का साधन माना गया है। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य से जुड़े कई बातों पर विचार करने की जरूरत है। धार्मिक व भावनात्मक मुद्दों के बीच स्वास्थ्य पर चिंतन आवश्यक है। वर्तमान समय में विकास का अर्थ सिर्फ अधोसंरचना व भौतिक विकास दूर संचार माध्यम कम्प्यूटर व आधुनिक सामग्री तक सीमित रह गया है। कुल मिलाकर सुख सुविधाओं व उपभोग की सामग्री से परिपूर्ण जीवन की सृष्टि। विकास के इन प्रचलित रूपों व स्थाई रूप से छाए धार्मिक मुद्दों ने स्वास्थ्यगत मुद्दों को पीछे धकेल दिया है। कुपोषण आज भी गम्भीर समस्या बनी हुई है। वर्तमान समय में जीवनशैली के विकार के कारण कई रोग बढ़ रहे हैं। विकृत जीवन शैली व उपभोक्ता वाद के कारण नकारात्मक मानसिकता पनपते जा रही है। व्यक्ति में बढ़ते जा रहे अवसाद तनाव व चिन्ता मानसिक व गम्भीर शारीरिक रोग ये सभी विकृत जीवन शैली का ही परिणाम है। आधुनिक जीवनशैली की पहचान बन रहे इन्टरनेट मोबाइल टीवी ने लोगों को संचार एवं ज्ञान विकास के साथ रोग भी दिये हैं। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि नयी पीढ़ी के लोगों में नशे व शारीरिक गतिहीनता के मामले बढ़े हैं। जिसके कारण भी हृदय रोगों का खतरा बढ़ा है। आराम पसन्दगी व सुविधा युक्त जीवनशैली के कारण कई गम्भीर शारीरिक रोग बढ़ रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली के कारण प्राकृतिक जीवनशैली से दूर होते जा रहे हैं। आधुनिक जीवनशैली के कारण कई रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। उच्च रक्तचाप डायबीटीस हृदय रोग कैंसर किडनी रोग एड्स आदि गम्भीर रोग बढ़ते जा रहे हैं। कुपोषण व स्वास्थ्य के लिए समाज को भी काम करने की जरूरत है। गौरतलब है कि वर्तमान समय में कम उम्र में ही कई गम्भीर रोगों का बढ़ना गम्भीर चिन्तन एवं शोध का विषय है। देश में युवाओं में हृदय रोगों का खतरा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। युवाओं में बढ़ रही हार्ट अटेक व कैंसर की समस्या राष्ट्रीय खतरे का संकेत दे रही है। स्वास्थ्य के मुद्दे को राजनैतिक प्राथमिकता में शामिल किया जाना चाहिए। विशेष कर नवजात शिशुओं किशोरों युवाओं का स्वास्थ्य बेहतर हो ताकि भविष्य की आबादी में स्वस्थ लोगों की संख्या अधिक हो।

मानसिक रोगियों की बढ़ती संख्या भी गम्भीर चिन्तन का विषय है। युवाओं का नशे की ओर प्रवृत्त होना कई घातक रोगों का कारण है। अति आधुनिकता,भागदौड़ का जीवन, प्रकृति से दूर होती जीवनशैली, नशे का बढ़ता प्रचलन ने व्यक्ति को अवसाद चिन्ता तनाव की स्थिति में पहुँचा दिया है जो स्वस्थ जीवन के लिए चुनौती बनती जा रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर भविष्य के लिए व्यवस्था व समाज को ध्यान देने की जरूरत है। विभिन्न रोगों का तेजी बढ़ना विशेषकर कम उम्र में ही रोगों का शिकार होना मानव जगत के स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। गम्भीर रोगों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकता में रखना चाहिए। उम्मीद की जानी चाहिए कि स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विभिन्न मतभेदों से उपर उठकर व्यापक जनहित में कार्य करेंगे आरोग्य के उपाय व सुविधा तथा सफाई आदि कार्य जीवन को स्वस्थ व शक्तिशाली बनाएँगे। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की जरुरत है। ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं सबके लिए सुलभ हो और कम खर्च में इलाज हो सके जिससे स्वस्थ भारत का लक्ष्य पूरा हो सके। बेहतर स्वास्थ्य के लिए लाइफ स्टाइल-आहार पर ध्यान रखकर स्वास्थ्य लाभ पाया जा सकता है। शारीरिक व मानसिक जीवन चर्या में सुधार तथा व्यवहारिक स्तर पर उपचार व चिकित्सा द्वारा स्वस्थ जीवन को सुनिश्चित किया जा सकता है।

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