ड्यूटी या दारू पार्टी? लटोरी अस्पताल में कैमरे ने खोली पोल, खबर वायरल होते ही गाज: पदस्थ अधिकारी निलंबित
सूरजपुर। जिले की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों में बेपरवाह रवैये का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। लटोरी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (अस्पताल) में ऑन-ड्यूटी मरीजों का इलाज करने के बजाय दारू और मुर्गा पार्टी मनाते कर्मचारियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में लटोरी अस्पताल का एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया। कैमरे में कैद तस्वीरों में दो फार्मासिस्ट और दो वार्ड बॉय अस्पताल परिसर के ही एक कमरे में बेफिक्र होकर बैठे नजर आ रहे थे। मेज पर बाकायदा शराब की बोतलें, डिस्पोजल ग्लास और मुर्गे का मीट सजा हुआ था।
जिस वक्त दूर-दराज से आए मरीज और उनके परिजन डॉक्टरों व स्टाफ की राह देख रहे थे, उस वक्त यह पूरा अमला अपनी इस ‘विशेष पार्टी’ में मशगूल था।
वायरल वीडियो का सच:
वायरल फुटेज में ऑन-ड्यूटी तैनात फार्मासिस्ट और वार्ड बॉय शराब के पैग बनाते और महफिल जमाते साफ दिखाई दिए। वीडियो सामने आते ही स्थानीय ग्रामीणों और मरीजों के परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया।
बीएमओ की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब लटोरी अस्पताल के प्रभारी बीएमओ डॉ. शत्रुघ्न भगत से इस बाबत जवाब मांगा गया। उन्होंने मामले से साफ पल्ला झाड़ते हुए खुद को इस पार्टी से अलग बताया।
हालांकि, मौके पर मौजूद कुछ कर्मचारियों ने कैमरे के सामने यह दावा कर सनसनी फैला दी कि इस पार्टी में बीएमओ भी शरीक थे। हालांकि प्रशासन अब इस दावे की निष्पक्ष जांच कर रहा है।
विभाग का सख्त रुख: गाज गिरी, अधिकारी व कर्मचारी निलंबित
खबर के मीडिया में उछलने और वीडियो के तेजी से वायरल होते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया। सरकारी सेवाओं के नियमों के धज्जियां उड़ाने और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने के इस मामले को उच्च अधिकारियों ने गंभीरता से लिया।
ताजा कार्रवाई की स्थिति:
- निलंबन की कार्रवाई: मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही और अनुशासनहीनता पाए जाने पर संबंधित पदस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- उच्चस्तरीय जांच समिति: पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के लिए एक विभागीय टीम का गठन किया गया है, जो बीएमओ की संलिप्तता समेत अन्य पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है।
जनसेवा पर बड़ा प्रश्नचिह्न
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी अस्पताल ही गरीब मरीजों का एकमात्र सहारा होते हैं। ऐसे में लटोरी अस्पताल का यह वाकया न केवल सेवा नियमों का घोर उल्लंघन है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे जिम्मेदारी के पद पर बैठे लोग मरीजों की सुरक्षा को ताक पर रख देते हैं।
फिलहाल निलंबन की कार्रवाई से विभाग ने सख्त संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन देखना यह होगा कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर क्या अंतिम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।