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त्याग ,तपस्या की प्रतिमूर्ति थी, डॉ दादी प्रकाशमणि जी – राजयोगिनी भगवती दीदी

रिपोर्ट अनमोल कुमार

सुपौल। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय सिमराही राघोपुर के तत्वधान में स्थानीय ओम शांति केंद्र पर ब्रह्माकुमारीज संस्थान की पूर्व मुख्य प्रशासिका डॉक्टर प्रकाशमणि दादी जी की 18बी स्मृति दिवस विश्व बंधुत्व दिवस के रूप में मनाया। कार्यक्रम का शुभारंभ राजबिराज नेपाल क्षेत्र के प्रभारी राजयोगिनी भगवती दीदी, स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बबीता दीदी ,समाजसेवी प्रोफ़ेसर बैजनाथ प्रसाद भगत,भाजपा नेता और व्यबसायिक सचिन माधोगरिया ,महेश यादब, अबध ना मेहता, सौरभ कुमार ,ब्रह्माकुमार किशोर भाईजी, इंद्रदेव भाई,ब्रह्माकुमारी सुमन बहन ,पुजा बहन, बीना बहन ,साक्षी बहन ,दीनानाथ भाई, सत्यनारायण भाई इत्यादि ओने संगठित रूप में दादी प्रकाशमणि जी की तस्वीर पर माल्यार्पण, फुल अर्पण एवं दीप प्रज्वलन कर के शुभारंभ किया।

नम्रता के मूर्ति राजयोगिनी डॉक्टर दादी प्रकाशमणि जी:-
ब्रह्माकुमारी भगवती दीदी

राजविराज नेपाल क्षेत्र प्रभारी राजयोगिनी भगवती दीदीजी अपने उदबोधन देते हुए कहा कि दादी प्रकाशमणि एक ऐसी महिला थी जो इस धरा पर आध्यात्म का प्रकाशपुंज बनकर आई और अपने ज्ञान-प्रकाश की शक्ति से लाखों लोगों के जीवन को आलोकित करके अव्यक्त हो गई।वर्ष 1969 में ब्रह्माकुमारीज के संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद उन्होंने इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय की कमान संभाली। उनकी दूरदृष्टि, कुशल प्रशासन, स्नेह, विश्व बंधुत्व की भावना और परमात्म शक्ति का ही नतीजा है कि आज संस्थान के विश्व के 140 देशों में सेवाकेंद्र हैं।

उन्होंने कहा कि दादी प्रकाशमणि ने नारी शक्ति की ऐसी मिसाल कायम की, जिसकी आज पूरी दुनिया बाद देती है। उन्होंने अपने कुशल प्रशासन से ये साबित करके दिखाया कि जब एक नारी कुछ ठान लेती है तो असंभव कार्य को भी संभव बना देती है। दादी की ममतामयी छांव में पलकर और उनके सानिध्य में हजारों चहने इस विश्व परिवर्तन के कार्य में सहयोगी जनीं। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन मानव कल्याण एवं महिलाओं को शक्ति स्वरूपा बनाने में लगा दिया। अपने अनुभव और परख शक्ति से अनेकों के जीवन में छिपी हुई शक्तियों को उजागर किया और परमात्म कार्य में सहयोगी बनाया, जिससे महिलाएं समाज के हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकें।

स्थानीय सेवा केंद्र प्रभारी राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी बबीता दीदी जी ने डॉक्टर प्रकाशमणि दादी जी की विशेषताएं बताते हुए कहीं दादी का स्वभाव बहुत ही मधुर ,सहनशील और सहकारिता था। दादी अपना समय ईश्वरिय सेवाओं में व्यतीत करती और अध्यात्म संगोष्ठियों में भाग लेने, व्याख्यान देने ,राजयोग सेवा केंद्र खोलने और यहां तक कि मधुबन में आने वाले के लिए भोजन तैयार करने में मदद करने जैसी यज्ञ की सभी सेवाएं करती थी। सभी को एक मां, एक मार्गदर्शक और एक प्रिय मित्र के रूप में दादी से प्यार रहता था ।हालांकि दादी की खासियत थी कि वह सारे ब्राह्मण परिवार को अपना मान करके पालना करती थी ।कोई भी अजनबी नहीं है हम सभी एक पिता के बच्चे वह हमेशा कहती थी। निर्माणभाव की धनि थी।
उन्होंने कहा दीप शीला डॉक्टर प्रकाशमणि जी प्रेम और स्नेह का प्रतिमूर्ति थी। उनकी आंख में सदैव प्रेम और खुशी की झलक दिखाई देता था। ब्रह्माकुमारीज संस्थान की सेवाओं को 78 देशों में फैलाने की निमित बनी। उनके प्रशासन में डर और अहंकार नहीं था, बलकि प्रेम और स्नेह था। लाखों ब्रह्मावत्स के लिए उनका जीवन आदर्श के रूप में रहा ।कभी किसी से कोई गलती होता था ,तो वह बहुत प्यार से इन्हें शान्ति पूर्वक उनको समझाती थी। और टोली खिलाती थी। आत्मिक दृष्टि दे उसको आगे बढ़ाती थी ऐसे बहू प्रतिभा की धनी डॉक्टर दादी प्रकाशमणि जी सभी के जीवन के लिए मार्गदर्शक बना है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी एवं व्यवसायिक प्रो बैधनाथ भगत जी ने अपने उदबोधन देते हुए कहा कि ज्ञान की कमी के कारण वर्तमान समय मानव के अंदर काम ,क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, नफरत आदि राक्षसी प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है ।जिसका कारण समाज में दिन-प्रतिदिन अब अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं।उसके लिए ब्रह्मा कुमारीज में सिखाई जाने वाली राज्यों एवं सत्संग का सहारा लेना चाहिए और इस पथ पर चलना भी चाहिए।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि कार्यकारी सदस्य भाजपा नेता एवं वरिष्ठ व्यावसायिक सचिन माधोगरियाजी ने कहा कि अगर हमने अपने भारत के पुरानी,सभ्यता ,संस्कार, परंपराएं पूर्व जनों की संस्कृति, सत्संग के माध्यम से फैलाई नहीं तो इस समाज में चलना ,रहना, बैठना, उठना जीना बड़ा कठिन महसूस होगा ।उन्होंने जीवन में सत्संग का महत्व बताते हुए कहा कि सत्संग के द्वारा प्राप्त ज्ञान ही हमारी असली संपत्ति है ।सत्संग के माध्यम द्वारा प्राप्त शक्तियां, सद्गुण, विवेक द्वारा हम अपने कर्मों में सुधार ला सकते हैं ।उन्होंने बताया कि सत्संग द्वारा प्राप्त शक्तियां, सद्गुण की कमाई को ना तो चोर लूटता है, ना ही आग जल आती है, नहीं पानी डुबाता है ।यह तो हमारी साथ जाने वाली असली संपत्ति है ।इसका प्राप्त करने से ही जन्म जन्मांतर हम महान बन सकते हैं ।ऐसे कमाई को प्राप्त करने के लिए भी हम अपना समय देना चाहिए। सत्संग से प्राप्त ज्ञान द्वारा ही हम अपने जीवन को सकारात्मक बनाकर तनाव मुक्ति जीवन जी सकते हैं। ब्रम्हाकुमारी यों के द्वारा दिए गए ज्ञान औऱ क्रियाकलापों को सराहना भी किया।

उक्त कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमार किशोर भाई जी ने किया ।मौके पर समाजसेवी प्रो बैधनाथ भगत, कार्यकारी सदस्य भा ज पा सचिन माधोगरिया, टेकनिया वर्ल्ड के डायरेक्टर अतुल कुमार, डॉ बीरेन्द्र प्रसाद सह,अरुण जायसवाल, व्यबसायिक भूपेंद्र यादव,महेश यादव,अवध नारायण मेहता, अधिवक्ता रामचंद्र जयसवाल, सतीश कुमार, व्यबसायिक दीपक शर्मा,इंद्रदेव चौधरी, सतयनारायण भाई, बेचू भाई, सावित्री देवी,शकुंतला देवी, किशोर भाई ,शान्ति देवी,महेंद्र भाई ,ब्रह्माकुमारी सुमन बहन, बिना बहन,पुजा बहन ,साक्षी बहन इत्यादि सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद थे।

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