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डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “प्रेम व समरसता का संदेश दे रहा है ग्राम निपानी की नाटक” मण्डली।

Cg24News-R :- दुर्ग जिला मुख्यालय से दूरस्थ व खारुन नदी के सुरम्य तट पर बसे गाँव निपानी अंचल में गौरवशाली गाँव के रूप में ख्यातिप्राप्त है। यह सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रमों खेलकूद व अन्य सामाजिक गतिविधियों के लिए अंचल में ख्यातिनाम है।विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में यहाँ की नाटक मण्डली का विशेष स्थान है। यहाँ की नाटक मण्डली अन्य गाँव में प्रतियोगिता में भाग लेकर पुरस्कृत भी हुआ है। आधुनिकता का प्रभाव यहाँ भी पड़ा। इसलिए पात्रों में आई रूचि में कमी के कारण रात्रिकालीन नाट्य कार्यक्रम नहीं होता। वर्तमान समय में रावण दहन की परम्परा कायम है। यहाँ की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अन्य समुदाय के लोग भी इस कार्यक्रम में विगत कई वर्षों से भाग लेते आ रहे हैं।इस तरह ग्राम निपानी में एकता और समरसता की गौरवशाली परंपरा आज भी कायम है। यहाँ की नाटक मण्डली बुजुर्गों के समय से प्रदर्शन के रूप में परम्परा निभाते आ रही है। वर्तमान समय में कुछ पात्र विगत कई वर्षों से रामायण के विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहा है। रावण वध के पश्चात दशहरा के महात्म्य के आधार गाँव में रैनी पेड़ की पूजा की परम्परा आज भी कायम है। राम लक्ष्मण अभिनीत पात्र द्वारा गाँव के ठाकुर देव में समर्पित कर सभी ग्रामवासी रैनी पत्ते जिसे सोनपत्ती भी कहा जाता है को एक-दूसरे को समर्पित कर परस्पर प्रेम एकता और सम्मान व्यक्त करते हैं। इस तरह गाँव में सामाजिक समरसता कायम रखे हुए हैं। ज्ञातव्य है कि असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक दशहरा का पर्व हमें आपसी भेदभाव समाप्त कर एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण और प्रेमपूर्ण रहना सिखाता है। यहाँ की गरिमामयी संस्कृति हमेशा कायम रहे। ईश्वर का अनुग्रह व आशीर्वाद गाँव निपानी को सदैव मिलता रहे।प्रेम व समरसता का संदेश दे रहा है ग्राम निपानी की नाटक मण्डली।दुर्ग जिला मुख्यालय से दूरस्थ व खारुन नदी के सुरम्य तट पर बसे गाँव निपानी अंचल में गौरवशाली गाँव के रूप में ख्यातिप्राप्त है। यह सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रमों खेलकूद व अन्य सामाजिक गतिविधियों के लिए अंचल में ख्यातिनाम है।विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में यहाँ की नाटक मण्डली का विशेष स्थान है। यहाँ की नाटक मण्डली अन्य गाँव में प्रतियोगिता में भाग लेकर पुरस्कृत भी हुआ है। आधुनिकता का प्रभाव यहाँ भी पड़ा। इसलिए पात्रों में आई रूचि में कमी के कारण रात्रिकालीन नाट्य कार्यक्रम नहीं होता। वर्तमान समय में रावण दहन की परम्परा कायम है। यहाँ की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि अन्य समुदाय के लोग भी इस कार्यक्रम में विगत कई वर्षों से भाग लेते आ रहे हैं।इस तरह ग्राम निपानी में एकता और समरसता की गौरवशाली परंपरा आज भी कायम है। यहाँ की नाटक मण्डली बुजुर्गों के समय से प्रदर्शन के रूप में परम्परा निभाते आ रही है। वर्तमान समय में कुछ पात्र विगत कई वर्षों से रामायण के विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहा है। रावण वध के पश्चात दशहरा के महात्म्य के आधार गाँव में रैनी पेड़ की पूजा की परम्परा आज भी कायम है। राम लक्ष्मण अभिनीत पात्र द्वारा गाँव के ठाकुर देव में समर्पित कर सभी ग्रामवासी रैनी पत्ते जिसे सोनपत्ती भी कहा जाता है को एक-दूसरे को समर्पित कर परस्पर प्रेम एकता और सम्मान व्यक्त करते हैं। इस तरह गाँव में सामाजिक समरसता कायम रखे हुए हैं। ज्ञातव्य है कि असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक दशहरा का पर्व हमें आपसी भेदभाव समाप्त कर एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण और प्रेमपूर्ण रहना सिखाता है। यहाँ की गरिमामयी संस्कृति हमेशा कायम रहे। ईश्वर का अनुग्रह व आशीर्वाद गाँव निपानी को सदैव मिलता रहे।

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