डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “सफल कृषि और स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है मोटे अनाज की खेती”।
B. R. SAHU CO-EDITOR
Cg24News-R:- मानव जीवन में रोटी जीवन की मूल व अनिवार्य आवश्यकता है। भोजन से ही शरीर को जीवनी शक्ति मिलती है। लेकिन पर्यावरण में बदलते परिवेश व अन्य कारणों व अन्य कारणों से हाइब्रिड बीजों का उपयोग व केमिकल्स या रसायनयुक्त भोजन के कारण शरीर पर इनका बुरा असर पड़ रहा है। अनाज व अन्य खाद्य पदार्थों में पौष्टिकता व गुणवत्ता कम होते जा रही है। अन्य खाद्य पदार्थों विशेषकर चांवल में सूक्ष्म पोषक का अभाव हो रहा है । कुपोषण का कारण भोजन में आवश्यक पोषक तत्व का न होना भी है। इनसे संतुलित आहार व आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाता है। इसके कारण कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाता है जिससे शरीर आसानी से बीमारीयों से ग्रसित हो जाता है। परम्परागत खेती से शुद्ध व गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलता था। फलस्वरूप शरीर निरोग व स्वस्थ रहता था। वर्तमान समय में हाइब्रिड बीज के माध्यम से अधिक पैदावार के नाम पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने हमारे परम्परागत खेती को प्रभावित किया है। फलस्वरूप खेती करने के लिए बाजार पर निर्भरता बढ़ते जा रही है। वर्तमान समय में मोटे अनाज की खेती छुटती जा रही है।कुछ ऐसी हाइब्रिड धान की फसल हैं जिसके उत्पादन में दाम बहुत मिलता है लेकिन किसानों को बाजार पर निर्भर रहना पड़ता है। साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो रही है। ऐसी स्थितियों में जल संरक्षण मिट्टी के प्राकृतिक उपजाऊ पन बढ़ाने के उपाय आदि उपायों को अपनाने की जरुरत है। कृषि के जानकारों ने अनुसार पहले मोटे अनाज को भोजन के साथ औषधि के रूप में माना जाता था ।वहीं किसानों को कम मेहनत करनी होती थी। वर्तमान समय में कुछ रिसर्च हुए हैं जिससे यह बात सिद्ध होता है। कोदो शुगर फ्री यानि शर्करामुक्त चांवल के रूप में पहचाने जाने वाली मुख्य फसल है। यह स्वास्थ्यवर्धक अनाज है जो मौजूदा परिवेश अत्यंत उपयोगी है। इसी तरह इन्दिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कृषि वैज्ञानिकों ने परम्परागत गुरमटिया धान को शुगर फ्री यानि शर्करामुक्त अनाज बताता है। उल्लेखनीय है कि बीते दिनों आई रिपोर्ट के अनुसार दुनिया का हर पाँचवा मधुमेह रोगी भारतीय। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शुगर रोगियों की संख्या ऐसी बढ़ती रही तो औसत में हर दूसरा व्यक्ति व्यक्ति शुगर का मरीज होगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसी परिस्थितियों से स्पष्ट है कि अच्छी सेहत के लिए मोटे अनाज का कितना महत्व है। मोटे अनाज की खेती को सरकार द्वारा प्रोत्साहन दिया जा रहा है।मोटे अनाज की खेती के लिए भले ही कम रकबे से शुरू हो लेकिन ऐसी पहल की जानी चाहिए। सरकार को कोदो आदि मोटे अनाज की खेती के लिए किसानों को कोदो या अन्य अनाजों के बीज का वितरण किया जाना चाहिए और फसल तैयार करने के लिए पर्याप्त राशि दिया जाना चाहिए। कोदो कुटकी ज्वार बाजरा आदि की खेती करने के लिए बीज एवं एवं अन्य संबंधित सामग्री भी किसानों को निःशुल्क उपलब्ध कराया जाना चाहिए। जिससे इन अनाजों से पौष्टिक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर व औषधीय गुणों से युक्त अनाज उपलब्ध हो सके।