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डॉ. बिजेंद सिन्हा जी का संपादकीय लेख “समानता करूणा भक्ति की प्रतीक है मां कर्मा”।

पाटन : वर्तमान समय में सूखती मानवीय संवेदनाओं,मानवीय जीवन में आ रही मानवीय मूल्यों में क्षीणता व कमजोर पड़ते रिश्तों के दौर में भक्त माता कर्मा के करूणा भक्ति सेवा त्याग समानता आदि गुण अनुकरणीय हैं। मां कर्मा के जीवन से आत्मबल परोपकार नारी शक्ति जागरण समर्पण सामाजिक समरसता निर्भिकता समानता दया करूणा भक्ति और राष्ट्र भावना की शिक्षा मिलती है।उन्होंने अन्याय का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने संसार के हर दुख सुख को स्वीकार किया और उसका मुकाबला किया जो आज के तनावग्रस्त व कमजोर पड़ते रिश्तों के दौर में उनका ऐसा गृहस्थ व पारिवारिक मूल्यों से परिपूर्ण व्यक्तित्व प्रासंगिक हैं।

मां कर्मा धार्मिक आडम्बर ऊंच-नीच रूढ़ीवाद छुआछूत को दूर कर समाज में चेतना जागृत किया। उन्होंने मानव समाज को समरसता का संदेश दिया जो हमारा आदर्श होना चाहिए। मां कर्मा जैसी वीरांगना सभी समाज के लिए प्रेरणास्पद होते हैं। भक्त संत गुरु व महापुरुष किसी विशेष समूह समुदाय प्रान्त व राष्ट्र की सीमाओं में बंधे नहीं हो ते बल्कि अपने महान व्यक्तित्व से दुनिया को मार्गदर्शन व भक्ति एवं ज्ञान के प्रकाश से आलोकित कर लोक कल्याण करते हैं।

मौजूदा परिवेश में हम आध्यात्मिक मूल्यों व संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। अति आधुनिकता के फेर में हम अपने मूल संस्कारों को ही भूलते चले जा रहे हैं। वर्तमान समय में मनुष्य विभिन्न आधुनिक टेक्नोलॉजी से घिरते चले जा रहे हैं। ऐसे में आत्मकल्याण मोक्ष आध्यात्म आत्मज्ञान जैसे मानव जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य को ही भूलते चले जा रहे हैं। वर्तमान समय में आवश्यकता अपने जीवन के लक्ष्य को जानने की है। भक्त संत व गुरु मनुष्य को उनके जीवन लक्ष्य तक पहुंचाता है। मां कर्मा का जीवनदर्शन भी जन सामान्य को जीवनलक्ष्य तक पहुंचाने की प्रेरणा प्रदान करता है। मां कर्मा की जीवनी मानव कल्याण के लिए प्रेरणा दायक है। परम वंदनीय मां कर्मा को शत-शत नमन।
भक्त माता कर्मा जयंती पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

Bijendra sinha.

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