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श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ कथा में कृष्ण जन्म पर झूम उठे श्रद्धालु।

Cg24News-R(by.yousuf.khan) :- ग्राम अंडा में साहू परिवार के द्वारा आयोजित श्री मद भागवत ज्ञान यज्ञ कथा में कथा के पंचम दिवस में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ।

जिस पर पंडाल रूपी गोकुल धाम में खुशियां छा गई। लोग खुशी से झूम उठे। कथा में पं दिग्विजय शर्मा जी ने कृष्ण जन्म की कथा में बताया कि श्री कृष्ण देवकी के 8 वे संतान थे। मां देवकी के भाई और श्री कृष्ण के मामा राजा कंस थे जो राक्षसी प्रवृति का था। कंस के लिए आकाशवाणी हुआ था कि देवकी के 8वे संतान तुम्हारा काल बनेगा । तब कंस ने देवकी और और वासुदेव को कारागार में डाल दिया और उनके द्वारा जन्म लिए सभी बच्चे को अर्थात 7 बच्चो को पत्थर पर पटक पटक कर मार डाला 8 वे संतान के रूप में भगवान नारायण ने स्वयं श्री कृष्ण भगवान के रूप में अवतार लिया। जब भगवान का जन्म हुआ तो कारागार के सारे दरवाजे, बेडिया, आदि अपने आप खुल गए और रात में श्री कृष्ण के पिता वासुदेव ने नदी पार करके गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचा दिए। और भगवान श्री जन्म की खुशी में सारे गोकुल में खुशियां छा गई, बधाईयों का माहौल छा गया। इस कथा में वासुदेव द्वारा भगवान को सुरक्षित नंद बाबा के घर पहुंचने की झांकी भी मंच पर प्रस्तुत किया गया। कथा को आगे बढ़ाते हुए जन्मोत्सव का कार्यक्रम कथा के अगले दिन किया जाएगा। जन्मोत्सव के दिन के कथा में भगवान नारायण द्वारा वामन अवतार की भी कथा बताया गया ।जिस पर भगवान ने 3 पग में पूरे ब्रम्हांड को नाप दिए। राजा बलि अपने दान पर दिए हुए वचन से पीछे नहीं हटा। इस कथा के माध्यम से पंडित जी ने धरती मां के प्रति प्रेम करने, और धरती मां के प्रति सम्मान करते हुए पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि सुबह सोकर उठते ही धरती मां को प्रणाम करते हुए अपने दिन की शुरुआत करनी चाहिए। मां धरती को दूषित करने वाली वस्तु जैसे झिल्ली, डिस्पोजल, प्लास्टिक आदि का उपयोग कम से कम करने की अपील किया। और साथ ही साथ अधिक से अधिक वृक्ष लगाने की अपील किया। आदरणीय गुरुजी अपने प्रति दिवस की कथा में कथा के साथ साथ लोगो तक अर्थात समाज तक एक अच्छा विचार का संचार कर समाज को भारतीय संस्कृति, सभ्यता, पर्यावरण के प्रति अच्छे संदेश देकर जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। अगले दिन की कथा श्री कृष्ण का जन्मोत्सव, श्री कृष्ण की बाल लीला का सविस्तर वर्णन किया जाएगा।

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