* युवा कांग्रेस राष्ट्रीय सचिव निखिल द्विवेदी का भाजपा पर तीखा हमला, पुलिस ने किया नजरबंद…
* लखपति दीदियों को कचरा गाड़ियों में लादना सम्मान नहीं अपमान है…
लखपति दीदियों को कचरा गाड़ियों में लादकर कार्यक्रम स्थल तक लाया गया। यह सम्मान नहीं बल्कि महिलाओं का अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर भाजपा वास्तव में महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही है तो क्या महिलाओं को इस तरह से मंच पर लाना उनका सम्मान कहलाएगा।
श्री द्विवेदी ने कहा कि यह दिखाता है कि भाजपा की सोच आज भी महिलाओं को केवल प्रचार का माध्यम मानती है। न कि समाज का सम्मानित हिस्सा। हाल ही में हुए बिलासपुर रेल हादसे पर भी राज्य सरकार और शीर्ष नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता इस दुखद घटना पर खामोश क्यों हैं? जब सैकड़ों परिवारों पर दुख का पहाड़ टूटा है, तब सत्ता पक्ष की चुप्पी बहुत कुछ कहती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार केवल इवेंट और भाषणों में व्यस्त है, जबकि जनता की सुरक्षा और बुनियादी मुद्दे पीछे छूट चुके हैं। महामहिम उपराष्ट्रपति राधाकृष्ण जी के एक कार्यक्रम में दिए अंग्रेज़ी भाषण पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि आम जनता को अंग्रेज़ी भाषणों से कोई सरोकार नहीं।
वहीं हमारी छत्तीसगढ़ महतारी की फोटो इस कार्यक्रम से भी हटा दिया गया है वहीं राजगीत भी शासकीय कार्यक्रम में नहीं बजाया गया जो छत्तीसगढ़िया लोगों का अपमान है जनता के बीच जुड़ाव की कमी साफ़ दिखाई देती है। जब जनता हिंदी में सुनना चाहती है, तब अंग्रेज़ी में भाषण देना जनता से दूरी का प्रतीक है। उन्हें आज राजनांदगांव में नजरबंद करके रखा गया।
वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी इसे लोकतंत्र का दमन बताया और कहा कि यह जनता की आवाज़ को कुचलने की साजिश है। स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा अब जनता को भ्रमित नहीं कर पाएगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता के मुद्दों पर लगातार लड़ाई जारी रखेगी चाहे उसके लिए कितनी भी बंदिशें क्यों न झेलनी पड़ें। यह समय देश और प्रदेश में सच्चाई बोलने वालों पर पहरे लगाने का है, लेकिन जनता अब चुप नहीं बैठेगी पार्टी कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजनांदगांव की यह राजनीतिक हलचल आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकती है।
निखिल द्विवेदी के इस बयान ने न केवल भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया है बल्कि महिला सम्मान रेल हादसा और लोकतंत्र की स्थिति जैसे मुद्दों को फिर से बहस के केंद्र में ला दिया है।
