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2 बोरी आटे के बदले बेटी की शादी का दावा, गाजा पर UNFPA रिपोर्ट में गंभीर खुलासा

2 बोरी आटे के बदले बेटी की शादी का दावा, गाजा पर UNFPA रिपोर्ट में गंभीर खुलासा
गाजा में बाल विवाह के मामलों में 123% उछाल, UNFPA रिपोर्ट में महिलाओं पर बढ़ते हिंसा के जोखिम का खुलासा

गाजा (न्यूज़ डेस्क)। युद्ध, विस्थापन, गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच गाजा में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर तस्वीर सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच गाजा में रिपोर्ट किए गए जबरन और बाल विवाह के मामलों में 123% की बढ़ोतरी हुई।
UNFPA की रिपोर्ट के अनुसार, परिवारों पर बढ़ते आर्थिक और सामाजिक दबाव के बीच कुछ मामलों में कम उम्र की लड़कियों की शादी को एक तरह के survival mechanism के तौर पर अपनाए जाने की जानकारी सामने आई है। भूख, गरीबी, विस्थापन और स्कूलों के बंद होने को इस बढ़ोतरी से जुड़े प्रमुख कारकों में गिना गया है।

14 साल की लड़की की शादी दो बोरी आटे के बदले करने का दावा
रिपोर्ट में शामिल गवाही के मुताबिक, एक पिता ने अपनी 14 वर्षीय बेटी की शादी दो बोरी आटे के बदले कर दी। इस तरह के मामले को UNFPA ने गाजा में बेहद कठिन परिस्थितियों के बीच सामने आ रहे बाल विवाह के जोखिम के उदाहरण के तौर पर दर्ज किया है। UNFPA की पहले की रिपोर्टिंग में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां विस्थापन और आर्थिक संकट के बीच परिवारों ने बेटियों की शादी को सुरक्षा या आर्थिक बोझ कम करने के विकल्प के तौर पर देखा।

यौन हिंसा के बाद शादी कराने की घटनाओं की रिपोर्ट
UNFPA की रिपोर्ट में यौन हिंसा और उसके बाद पीड़िताओं पर सामाजिक दबाव से जुड़े मामले भी दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ महिलाओं और लड़कियों ने ऐसी घटनाओं के बारे में जानकारी दी, जिनमें कथित यौन हिंसा के बाद परिवार या समुदाय की ओर से शादी को समाधान के तौर पर देखा गया। कुछ मामलों में कथित आरोपी या किसी दूसरे व्यक्ति से शादी कराने की कोशिश किए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल है। ऐसे मामलों को व्यक्तिगत गवाहियों और रिपोर्ट किए गए मामलों के रूप में देखना जरूरी है; इन्हें गाजा की सभी महिलाओं या परिवारों की सामान्य स्थिति के रूप में पेश नहीं किया जा सकता।

विस्थापन शिविरों में 230 महिलाओं से बातचीत
UNFPA की अलग रिपोर्ट “Women’s Voices From Displacement Camps in Khan Younis and Gaza City” में गाजा सिटी और खान यूनिस के विस्थापन शिविरों में रहने वाली 230 महिलाओं के अनुभव दर्ज किए गए हैं। यह अध्ययन दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच किए गए 16 फोकस ग्रुप डिस्कशन पर आधारित है। महिलाओं ने टेंट, अस्थायी शेल्टर और सार्वजनिक स्थानों में सुरक्षा की कमी तथा निजता के अभाव से जुड़े जोखिमों के बारे में बताया।

दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों पर भी बढ़ा खतरा
रिपोर्ट में दिव्यांग महिलाओं और लड़कियों को विशेष रूप से संवेदनशील समूह के तौर पर चिन्हित किया गया है। कुछ गवाहियों में बताया गया कि शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण ऐसी लड़कियों के लिए हिंसा के बाद मदद मांगना और घटना की जानकारी देना और मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट में एक मामले में एक लड़की के कई घंटों तक लापता रहने और बाद में उसके गर्भवती पाए जाने की गवाही भी दर्ज की गई है। हालांकि, ऐसे व्यक्तिगत मामलों में आरोपियों की पहचान या घटना की स्वतंत्र पुष्टि हमेशा उपलब्ध नहीं है।

माता-पिता की मौत के बाद कम उम्र में शादी का दबाव
युद्ध के दौरान माता-पिता या देखभाल करने वालों को खो चुकी लड़कियों के सामने भी कम उम्र में शादी का खतरा बढ़ने की बात रिपोर्ट में कही गई है। कुछ महिलाओं ने बताया कि परिवार के पुरुष रिश्तेदार आर्थिक जिम्मेदारी उठाने में असमर्थ या अनिच्छुक होने पर कम उम्र की लड़कियों की शादी कर देते हैं।

UNFPA पहले भी कह चुका है कि गाजा में विस्थापन, गरीबी और परिवार के सहारे के टूटने से बाल विवाह का जोखिम बढ़ा है।

परिवार के भीतर भी हिंसा की शिकायतें
रिपोर्ट में केवल बाहरी सुरक्षा खतरे ही नहीं, बल्कि घरेलू हिंसा के मामलों का भी जिक्र है। महिलाओं ने पति, पिता, भाई या ससुराल के सदस्यों की ओर से मारपीट, गाली-गलौज और अन्य प्रकार की हिंसा की घटनाओं के बारे में बताया। रिपोर्ट में महिलाओं ने विस्थापन, बेरोजगारी, गरीबी, घरों के तबाह होने और लगातार तनाव को पारिवारिक तनाव बढ़ने से जोड़कर देखा।

भीड़भाड़ और निजता की कमी बनी चुनौती
विस्थापन शिविरों में बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ रहने के कारण महिलाओं के लिए निजी और सुरक्षित जगह की कमी भी एक प्रमुख समस्या बताई गई है। UNFPA के मुताबिक, गाजा में लगभग 500 विस्थापन स्थलों पर महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंच आसान नहीं है। ऐसे सुरक्षित केंद्र हिंसा की शिकायत करने और चिकित्सा, मनोसामाजिक, कानूनी तथा आर्थिक सहायता पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लैंगिक हिंसा के मामलों में भी बढ़ोतरी
UNFPA के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 की तुलना में अप्रैल-जून 2026 में रिपोर्ट किए गए लैंगिक हिंसा (GBV) के मामलों में 27% की और वृद्धि हुई। जनवरी-मार्च में पिछली तिमाही के मुकाबले भी 32% बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून में रिपोर्ट किए गए GBV मामलों में लगभग 31% शारीरिक हिंसा, जबकि करीब 31% मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक हिंसा से जुड़े थे। संसाधनों, भोजन, नकद सहायता और अन्य सुविधाओं से वंचित किए जाने के मामले भी लगभग एक-तिहाई मामलों में शामिल थे।

यौन हिंसा के मामलों में 61% बढ़ोतरी
UNFPA की ताजा रिपोर्टिंग में जनवरी-जून 2026 के दौरान रिपोर्ट किए गए यौन हिंसा के मामलों में 61% वृद्धि का उल्लेख है। हालांकि, संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिपोर्टेड मामलों में बढ़ोतरी केवल हिंसा बढ़ने का संकेत नहीं है; सुरक्षा और सहायता सेवाओं के विस्तार के कारण अधिक सर्वाइवर्स के सामने आकर शिकायत दर्ज कराने से भी आंकड़े बढ़ सकते हैं।

खाने और मानवीय सहायता पर नियंत्रण की शिकायतें
रिपोर्ट में कुछ महिलाओं ने यह भी बताया कि परिवार में मानवीय सहायता से मिली खाद्य सामग्री और अन्य संसाधनों पर पुरुष सदस्यों का नियंत्रण रहता है। UNFPA के अनुसार, भोजन, नकद सहायता, आश्रय और दूसरी जरूरी मदद से वंचित किया जाना गाजा में रिपोर्ट की जाने वाली लैंगिक हिंसा का एक बड़ा हिस्सा है।

हिंसा झेलने के बावजूद घर छोड़ना मुश्किल
रिपोर्ट में शामिल महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि घरेलू हिंसा से बाहर निकलना भी आसान नहीं है। विस्थापन, बच्चों की जिम्मेदारी, सुरक्षित आश्रय की कमी और परिवार से मिलने वाले सीमित सहयोग के कारण कई महिलाएं हिंसक परिस्थितियों में ही रहने को मजबूर हो सकती हैं। UNFPA ने महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थानों, मनोसामाजिक सहायता, कानूनी मदद और लैंगिक हिंसा से निपटने वाली सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई है।

महत्वपूर्ण तथ्य
* जबरन और बाल विवाह: जनवरी-जून 2026 में रिपोर्टेड मामलों में 123% वृद्धि।
* रिपोर्टेड GBV: अप्रैल-जून में जनवरी-मार्च की तुलना में 27% वृद्धि।
* शारीरिक हिंसा: रिपोर्टेड GBV मामलों का लगभग 31%।
* संसाधनों से वंचित करना: रिपोर्टेड मामलों का लगभग एक-तिहाई।

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