मुख्यमंत्री श्री साय ने किया 36.47 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित आधुनिक आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई और केन्द्रीय भंडार गृह परिसर का लोकार्पण
इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री विजय बघेल, विधायक श्री डोमन लाल कोर्सेवाड़ा, श्री सम्पत लाल अग्रवाल, श्री ललित चन्द्राकर, श्री गजेन्द्र यादव एवं श्री रिकेश सेन, महामण्डलेश्वर हरिद्वार श्रीश्री 1008 डॉ. स्वामी कैलाशनंद गिरी जी महाराज, स्थानीय आदिवासी स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, वन विकास निगम के अध्यक्ष श्री रामसेवक पैकरा, वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, छत्तीसगढ़ राज्य वनोपज संघ प्रबंध संचालक श्री अनिल कुमार साहू, छ.ग. राज्य वनोपज संघ के कार्यकारी अध्यक्ष श्री एस. मणिकासगन उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए वादे को हमारी सरकार ‘मोदी की गारंटी’ को पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूर्ण किया जा रहा है। हमारी सरकार डेढ़ वर्षो से लगातार विकास की ओर अग्रसर है। तीन करोड़ जनता से किए गए वादों को हमारी सरकार पूरा कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत पांच वर्षो में गरीब जनता ’’प्रधानमंत्री आवास योजना’’ से वंचित रह गई थी, जिसे हमारी सरकार बनते ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवासों की स्वीकृति दी और निर्माण कार्य प्रारंभ किया, जो पूर्णता की ओर है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय की संवेदनशीलता को देखने को मिली। उन्होंने ग्राम बढ़भुम जिला बालोद निवासी महिला हितग्राही श्रीमती शकुंतला कुरैटी को अपने हाथों से चरण पादुका पहनाया। इसके साथ ही अन्य हितग्राही श्रीमती वैजयंती कुरैटी, श्रीमती निर्मला उईके, श्रीमती ललिता उईके, श्रीमती अघनतीन उसेंडी को भी वन मंत्री सहित सभी अतिथियों ने अपने हाथों से चरण पादुका पहनाया। राज्य में आयुर्वेद और वनौषधियों के महत्व को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने आज तीन नई हर्बल इकाइयों का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने लोगों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में जुड़ने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पेड़ जरूर लगाना चाहिए और उसका संरक्षण करना चाहिए। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी और प्रकृति के रूप में माँ के प्रति सम्मान बना रहेगा।
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कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44.10 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र है। जिसके कारण राज्य में वनोपज की बहुलता है। यह प्रसंस्करण इकाई मध्य भारत का सबसे बड़ा प्रसंस्करण इकाई है। इसके प्रारंभ होने से वनोपज का संग्रहण, प्रसंस्करण के साथ-साथ वनोपज के उत्पाद को बेहतर बाजार मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का वनोपज को पूरी दुनिया तक पहुंचे इस उद्देश्य से इस इकाई की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 67 प्रकार के वनोपज का संग्रहण किया जाता है और वनोपज संग्रहण से जुड़े 13 लाख 40 हजार वनवासियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
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महा मण्डलेश्वर हरिद्वार, श्री श्री 1008 स्वामी कैलाशनंद गिरी जी महाराज ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुर्वेदिक औषधियां की महत्ता पर प्रकाश डाला । उल्लेखनीय है कि आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा को विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जोड़कर ’’फारेस्ट टू फर्मेंसी मॉडल’’ को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। 27.87 एकड़ क्षेत्र में 36.47 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई से प्रतिवर्ष 50 करोड़ रूपए मूल्य के उत्पाद तैयार किये जाने का अनुमान है। यह इकाई प्रदेश के वनों में पायी जाने वाली औषधीय और लघु वनोपज जैसे महुआ, साल बीज, कालमेघ, गिलोय, अश्वगंधा आदि का संगठित एवं वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर चूर्ण सिरप, तेल, टैबलेट एवं अवलेह जैसे गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण करेगी।
वही युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त होने से स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए द्वार खुलेंगे। आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई में आधुनिक वेयर हाउस की 20,000 मीट्रिक टन की संग्रहण क्षमता विकसित की गई है, जिससे सीजनल वनोपजों के दीर्घकालीन संरक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण में सहायता मिलेगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के वोकल फ़ॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के विजन को मूर्तरूप देती है। यह न केवल वन उत्पादों के स्थानीय मूल्य संवर्धन का उदाहरण प्रस्तुत करती है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन, आर्थिक विकास और सामाजिक समावेशिता को भी सशक्त बनाती है।
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