रायपुर । छत्तीसगढ़ के पहले रैप सिंगर एप्पी राजा का सोमवार को रायपुर एम्स में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज एम्स में जारी था। एप्पी राजा के निधन की खबर सामने आते ही भानुप्रतापपुर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में उनके प्रशंसकों और शुभचिंतकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार 16 जून को भानुप्रतापपुर में किया जाएगा।
एप्पी राजा, जिनका असली नाम चेतन चांडक था, ने बेहद कम उम्र में रैप म्यूजिक की दुनिया में कदम रखा था। वे 13-14 साल की उम्र से ही रैप गाने लिखने लगे थे। उनका मशहूर गाना ‘टूरा भाेको लोलो’ रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था और इसी गाने ने उन्हें पूरे छत्तीसगढ़ में अलग पहचान दिलाई।
संघर्षों से भरी थी एप्पी राजा की जिंदगी
कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर निवासी एप्पी राजा का जन्म वर्ष 1994 में नवागढ़ में हुआ था। आर्थिक तंगी और पारिवारिक संघर्षों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई और संगीत दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ाया। शुरुआती पढ़ाई दुर्ग में हुई, बाद में उनका परिवार भानुप्रतापपुर आकर बस गया।
कक्षा 7वीं में उन्होंने अपना पहला रैप लिखा था, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे उसे रिकॉर्ड नहीं कर सके। साल 2015 में पंजाब की एक म्यूजिक कंपनी ने उनके टैलेंट को पहचाना और उन्हें लुधियाना बुलाकर पहला गाना रिकॉर्ड कराया।
‘टूरा भाेको लोलो’ से मिली पहचान
गाना रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर धमाल मच गया। लाखों लोगों ने यूट्यूब, फेसबुक और व्हाट्सऐप पर उनके गानों को सुना और शेयर किया। एप्पी राजा ने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, शहीद भगत सिंह और स्वतंत्रता दिवस जैसे विषयों पर भी रैप गाने बनाए।
परिवार की मदद के लिए किया नौकरी
एप्पी राजा का जीवन संघर्षों से भरा रहा। जब वे 11वीं कक्षा में थे, तभी उनके पिता को हार्ट अटैक आया और परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई। घर चलाने के लिए उनकी मां ने सिलाई का काम शुरू किया, जबकि एप्पी खुद गुजरात के सूरत में कपड़े की दुकान पर नौकरी करने चले गए। हालांकि संगीत के प्रति जुनून उन्हें वापस अपने सपनों की ओर खींच लाया।
पंजाब में संगीतकारों के साथ काम करते हुए उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर रैप इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। आज उनके लाखों फैंस हैं और उनका संगीत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।
