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छत्तीसगढ़ी लोकपर्व, छेरछेरा पुन्नी -धन नहीं धान का होता है दान -घनश्याम वर्मा

घनश्याम वर्मा , प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगगढ़ लोधी समाज

रायपुर : प्रदेश वासियों को ‘छेरछेरा पुन्नी’ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए छत्तीसगढ़ लोधी समाज के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम वर्मा ने छेरछेरा पर्व के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि, छेरछेरा पर्व पौष पूर्णिमा के दिन छत्तीसगढ़ में बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ आज 13 जनवरी 2025 को मनाया जा रहा है. इसे छेरछेरा पुन्नी या छेरछेरा तिहार भी कहते हैं.इसे दान लेने-देने का पर्व माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन धान्य की कोई कमी नहीं होती इस दिन छत्तीसगढ़ में बच्चे और बड़े, सभी घर-घर जाकर अन्न का दान ग्रहण करते हैं. छत्तीसगढ़ में छेरछेरा त्यौहार तब मनाया जाता है, जब किसान अपने खेतों से फसल काटकर एवं उसकी मिसाई कर अन्न (नया चावल) को अपने घरों में भंडारण कर चुके होते है। ⬇️शेष नीचे⬇️

उन्होंने कहा कि यह पर्व दान देने का पर्व है. किसान अपने खेतों में साल भर मेहनत करने के बाद अपनी मेहनत की कमाई धन को दान देकर छेरछेरा त्यौहार मनाते हैं. माना जाता है कि दान देना महा पुण्य का कार्य होता है. किसान इसी मान्यता के साथ अपने मेहनत से उपजाई हुई धान का दान देकर महान पुण्य का भागीदारी निभाने हेतु छेरछेरा त्यौहार मनाते हैं. इस दिन बच्चे अपने गांव के सभी घरों में जाकर छेरछेरा कह कर अन्न का दान मांगते और सभी घरों में अपने कोठी अर्थात अन्न भंडार से निकालकर सभी को अन्नदान करते हैं. गांव के बच्चे टोली बनाकर घर-घर छेरछेरा मांगने जाते हैं और कहते है कि *छेरिक छेरा छेर मरकनिन छेर छेरा…..माई कोठी के धान ला हेर हेरा* *‘अरन बरन कोदो दरन, जब्भे देबे तब्भे टरन’*

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