* साहित्यकार स्व. इंदुभूषण ठाकुर जी के नाम पर पुरस्कार होगा स्थापित – महापौर मधुसूदन यादव…
* साहित्यकार के जन्म शताब्दी वर्ष में उमड़े कवि/ साहित्यकार, कला / साहित्य सुधि एवं समाजसेवी जन, उड़ी काव्य रंग की बौछार…
नगर निगम के महन्त राजा बलराम दास सभागार में आयोजित इस साहित्यिक गरिमामय कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर मधुसूदन जी थे उन्होंने शहर के साहित्यानुरागी राकेश ठाकुर के पिता श्री एवं साहित्य मनीषी पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी के सानिध्य में रह कर द्विवेदी युगीन चर्चित पत्रिका सरस्वती के संपादक में सहयोग देने वाले साहित्यकार इंदुभूषण ठाकुर जी को कृतज्ञता पूर्वक याद किया और साहित्य समिति की मांग पर कहा कि जिस तरह संस्कार धानी नगरी के साहित्य त्रिवेणी पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी, गजानन माधव मुक्तिबोध, बल्देव प्रसाद मिश्र सहित नंदूलाल जी चोटियां, कुंजबिहारी चौबे जी के नाम पर निगम द्वारा पुरस्कार स्थापित है इसमें एक नाम साहित्यकार इंदुभूषण ठाकुर जी का और जुड़ जाएगा।
अब इन पुरस्कार श्रृंखला की निरंतरता बनी रहेगी। महापौर जी ने प्रायः इस तरह के साहित्यिक गरिमामय कार्यक्रम कराते रहने के लिए छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति को बधाई एवं शुभकामनाएं दी और कहा कि कवि / साहित्यकारों की साहित्यिक सजगता से देश और समाज को दिशा मिलती है।
उन्होंने काव्यायोजन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व ओजस्वी कवि शशिकांत द्विवेदी की हम ख़तरे में तुम खतरे में खतरनाक भी खतरे में की चर्चा करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में जिस तरह भयानक युद्ध की परिस्थिति बनी हुई इससे हम सभी खतरे में है। द्विवेदी जी ने अपनी कविता के माध्यम से हमें पहले ही आगाह किया था।
“निष्कपट प्रेम और अध्यात्म की कविताएं”
साहित्यकार स्व० इंदुभूषण ठाकुर की रचना संसार पर केंद्रित साहित्यिक आयोजन में आधार वक्तव्य सुयश इंदुभूषण ठाकुर ने दिया वहीं कवि शत्रुघन सिंह राजपूत ने स्व० ठाकुर की पांच कविताओं के सस्वर वाचन के साथ साहित्यिक आयोजन की शुरुआत की।
इस दौरान कवि प्रभात तिवारी ने ठाकुर जी के कविताओ की गहराई और प्रगतिशीलता पर चर्चा की वही समिति के संरक्षक आत्माराम कोशा “अमात्य” ने ठाकुर जी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा करते हुए उन्हें निष्कपट प्रेम व अध्यात्म का कवि बताया। समाजसेवी राजेश गुप्ता अग्रहरि ने साहित्यकार कभी स्वर्गीय नहीं होते कहते हुए, ठाकुर जी को साहित्य जगत की शान बताया।
समाज सेवी शारदा तिवारी ने उन्हें अपने पिता का गुरु बताया वहीं श्रीमती ओस्तवाल ने बहुरिया कह कर सम्मान देने वाला विद्वत व्यक्ति बताया। इस अवसर पर कस्तूरबा महिला मंडल की सचिव श्रीमती साधना तिवारी ने अपने उद्बोधन प्रस्तुत किए और साहित्य समिति के निरंतर साहित्यिक आयोजन और शहर में साहित्यिक सक्रियता बनाए रखने के लिए कस्तूरबा महिला मंडल की ओर से 21 सौ रुपए की राशि प्रदान की।
“आयोजन में काव्य रस- रंग की उड़ी फुहारे”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शशिकांत द्विवेदी ने क्या सुनना चाहोगे कविता पाठ से जहां उपस्थितो में देश प्रेम व राष्ट्र भक्ति का संचार किया वहीं रायपुर से पधारे हास्य व्यंग्य के कवि महेंद्र ठाकुर ने अपने व्यंग्य रचनाओं से काफी गुदगुदाया।
इस दौरान छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के केसीजी जिला समन्वयक सियाराम साहू ने मदिरालय पर अपनी सार्थक काव्य रचना की प्रस्तुति दी वहीं खैरागढ़ से पधारी कवयित्री डॉ पद्मा पर्वणी ने कबीर जयंती पर सुयधुर कविता पाठ का पाठ की ।
कवि अनुराग सक्सेना ने अपनी सुरमई गज़लो से माहौल बनाया वहीं कवि /कथाकार मानसिंह मौलिक ने देश में घटित हुई मंगेतर हत्याकांड पर बेबाकी से रचना पढ कर वाहवाही पाई।
कवि वीरेंद्र कुमार रंगारी की काव्य पाठ ने जहां जमकर तालियां बटोरी वहीं डॉ चंद्रशेखर शर्मा ने अपनी ओज पूर्ण कविता से समां बांधा ।शहर के ओजस्वी कवि शैलेष गुप्ता ने अपने काव्य पाठ से लोगों का दिल जीता।लोहारा बालोद की कवयित्री हर्षा देवांगन हर्ष ने नारी से संबंधित तरन्नुम में अपनी रचना पढ़ी। इस दौरान कवयित्री रेशमी साहू रश्मि, करिश्मा श्रीवास्तव, अपनी कविता पाठ से वाहवाही बटोरी।
“राजगीत “अरपा पैरी के धार”,, के गूंजे स्वर”
इस दौरान कवि / लोक कलाकार पप्पू पौर्वात्य’ कलिहारी,थंगेश्वर साहू “मीत”कवयित्री सुषमा शुक्ला “अंशुमन”, रेशमी साहू रश्मि, हर्षा देवांगन द्वारा राज गीत अरपा पैरी के धार का गान कर छत्तीसगढ़ महतारी को नमन किया गया।
इस दौरान नगर निगम नेता प्रति पक्ष संतोष पिल्ले द्वारा डोंगरगढ़ से पधारी वरिष्ठ कथाकार सुभदा मिश्र , प्रजापति ब्रह्मा कुमारी पुष्पा बहन जी महेंद्र ठाकुर जी का शाल श्री फल एवं स्मृति चिन्ह प्रदान आत्मीय सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का विद्वत संचालन सुषमा शुक्ला अंशुमन व थंगेश्वर साहू मीत द्वारा किया गया। काव्यायोजन के अंत में सभी आगत जनों का आभार प्रदर्शन समिति समन्वयक व साहित्य अनुरागी राकेश इंदु भूषण ठाकुर द्वारा किया गया।
साहित्य समिति के गिरीश ठक्कर स्वर्गीय, पूनाराम यादव ,डीसी जैन, अमलेंदू हाजरा, राजेंद्र गुरुजी, राजेश डागा, अमिता खंडेलवाल नारायण चितलांग्या श्री कांत इंदु भूषण ठाकुर व उनके परिजन स्वदेशी जागरण मंच कस्तूरबा महिला मंडल की समाज सेवी महिलाएं और बड़ी संख्या में साहित्य सुधि जन उपस्थित थे।