रिपोर्टर – सूरज साहू, धमतरी । छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में शिक्षा पहुँचाना अपने आप में एक चुनौती है… लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद कुछ नन्हें कदम रोजाना आंगनबाड़ी की ओर बढ़ते हैं – पढ़ने, सीखने और आगे बढ़ने के सपनों के साथ। मगर इन मासूमों की एक मासूम सी ख्वाहिश है
– “हमें भी ड्रेस मिल जाए, ताकि हम भी स्कूल ड्रेस पहनकर पढ़ाई करें…”
धमतरी जिले के झुंझराकसा गांव की यह तस्वीर दिल को छूने वाली है। यहाँ के आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने वाले नन्हे बच्चों के पास न तो स्कूल ड्रेस है, न ही कोई व्यवस्था। जब गांव के बड़े बच्चे स्कूल यूनिफॉर्म में जाते हैं, तो इन मासूमों की भी चाहत होती है कि वे भी वैसे ही ड्रेस पहनें।
नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है, स्कूलों में बच्चों को यूनिफॉर्म मिल भी चुकी है, मगर आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए शासन के पास अब तक कोई ड्रेस योजना नहीं है।
जीविका मरकाम, आंगनबाड़ी बच्ची – “मैडम हमें भी ड्रेस चाहिए… हम भी ड्रेस पहनकर पढ़ना चाहते हैं।” पवन मरकाम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता – झुंझराकसा – “बच्चे रोज ड्रेस की माँग करते हैं… जब वे स्कूल बच्चों को ड्रेस में देखते हैं तो खुद भी पूछते हैं – हमें कब मिलेगा? मगर शासन स्तर पर कोई प्रावधान नहीं है।”
आंगनबाड़ी में बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन यूनिफॉर्म जैसी बुनियादी ज़रूरत आज भी उपेक्षित है। अविनाश मिश्रा, कलेक्टर धमतरी – “शासन स्तर पर ड्रेस का कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन जनसहयोग से कोशिश की जा सकती है कि इन बच्चों के लिए ड्रेस की व्यवस्था हो सके।”
अब सवाल यह है कि इन मासूमों की यह छोटी सी पुकार क्या शासन-प्रशासन तक पहुँचेगी? और क्या महिला एवं बाल विकास विभाग भविष्य में इन नन्हे बच्चों की यह ख्वाहिश पूरी करेगा? “हम भी ड्रेस पहनेंगे, स्कूल जाएंगे… पढ़-लिखकर बड़ा सपना सजाएंगे…”
