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घुमका में चला बुलडोजर, नरसिंह यादव ने लगाए गंभीर आरोप ; हाईकोर्ट आदेश का भी दिया हवाला

घुमका में होटल पर बुलडोजर कार्रवाई का मामला, नरसिंह ने लगाए गंभीर आरोप

घुमका में होटल पर बुलडोजर कार्रवाई का मामला, नरसिंह ने लगाए गंभीर आरोप; हाईकोर्ट के आदेश का भी दिया हवाला

राजनांदगांव/घुमका। ग्राम कलडबरी में एक होटलनुमा दुकान को हटाए जाने की कार्रवाई को लेकर विवाद सामने आया है। दुकान संचालक नरसिंह यादव का आरोप है कि उनकी करीब 20 साल पुरानी दुकान पर तहसीलदार, राजस्व अमले और पुलिस बल की मौजूदगी में सरपंच गायत्री यदु  व् सरपंच पति चंद्रशेखर यदु द्वारा बुलडोजर चलवाकर उसे हटा दिया गया। नरसिंह का कहना है कि इसी दुकान से उनका परिवार लंबे समय से अपना जीवन-यापन कर रहा था।

नरसिंह यादव के मुताबिक, ग्राम पंचायत की ओर से पहले भी उनकी दुकान को हटाने को लेकर सरपंच श्रीमती गायत्री यदु ने नोटिस जारी किए गए थे। इसी मामले को लेकर उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

बेदखली आदेश को हाईकोर्ट ने किया था निरस्त

हाईकोर्ट के 21 सितंबर 2026 के आदेश के अनुसार, ग्राम पंचायत कलडबरी के सरपंच की ओर से 5 अगस्त, 21 अगस्त, 29 अगस्त और 7 सितंबर 2026 को जारी किए गए बेदखली संबंधी आदेशों को कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि ग्राम पंचायत सीधे बेदखली का आदेश जारी करने के लिए सक्षम नहीं है और ऐसे मामले में प्रकरण संबंधित राजस्व अधिकारी के समक्ष भेजा जाना चाहिए। ⬇️⬇️शेष नीचे पढ़े⬇️⬇️

हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने मामले के मेरिट यानी संबंधित संपत्ति पर याचिकाकर्ता के अधिकार या कब्जे की वैधता पर कोई फैसला नहीं दिया है। ग्राम पंचायत को कानून के अनुसार मामले को सक्षम राजस्व अधिकारियों के समक्ष रखने की स्वतंत्रता दी गई थी।

अब नरसिंह यादव का दावा है कि हाईकोर्ट के उक्त आदेश के बाद भी उन्हें उनकी दुकान से बेदखल करने की कार्रवाई की गई। उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत के सरपंच श्रीमती गायत्री यदु और उनके पति चंद्रशेखर यदु की ओर से तहसीलदार, सक्षम राजस्व अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी में उनकी दुकान पर बुलडोजर चलवाया गया।

पीड़ित ने लगाया आरोप- कहा हस्ताक्षर करने किया मजबूर 

पीड़ित नरसिंह यादव  ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उन्हें और उनके परिवार को दुकान हटाए जाने से आर्थिक नुकसान हुआ है और इसी दुकान से परिवार का भरण-पोषण होता था। उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित भूमि के कुछ अन्य हिस्सों पर भी अन्य लोगों का कब्जा है, और उन्हें भी पूर्व में सरपंच द्वारा अतिक्रमण हटाने नोटिस जारी किया था. लेकिन कार्रवाई केवल उनकी दुकान के खिलाफ की गई।

नरसिंह का यह भी आरोप है कि लगातार उन्हें कब्जा हटाने सरपंच पति द्वारा मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर दबाव बनाया जा रहा था और आज कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में अमला और पुलिस बल मौके पर पहुंचा, जिससे वह भयभीत हो गए और इन्ही परिस्थितियों के कारण उन्हें बेदखली पंचनामा पर न चाहते हुए भी हस्ताक्षर करना पड़ा।

अब पूरे मामले में यह महत्वपूर्ण होगा कि बुलडोजर कार्रवाई किस सक्षम आदेश/राजस्व कार्रवाई के आधार पर की गई और संबंधित पक्षों ने किस कानूनी प्रक्रिया का पालन किया। इस संबंध में प्रशासन और ग्राम पंचायत का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

 

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