* “न भर्ती कैलेंडर, न महंगाई पर राहत — कागजी विकास के पुलिंदे में आम जनता फिर उपेक्षित”*— ऋषि शास्त्री…
* “घोषणाओं का पुलिंदा है बजट, जमीनी हकीकत शून्य” रोजगार, महंगाई और धान खरीदी पर बजट मौन: सरकार पर बरसे ऋषि शास्त्री…
वही शास्त्री ने कहा कि प्रदेश का युवा आज भी रोजगार के लिए भटक रहा है, लेकिन बजट में न तो स्पष्ट भर्ती कैलेंडर का उल्लेख है और न ही स्थायी रोजगार सृजन की ठोस कार्ययोजना। उन्होंने कहा, “युवाओं को घोषणाएं नहीं, नियुक्ति पत्र चाहिए। सरकार उनके भविष्य के साथ अन्याय कर रही है।
किसानों की समस्याओं का उल्लेख करते हुए शास्त्री ने कहा कि धान खरीदी, समर्थन मूल्य, सिंचाई और बिजली दरों जैसे बुनियादी मुद्दों पर बजट मौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और मजदूरों की अपेक्षाओं की अनदेखी कर सरकार कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता दे रही है।
अंत में शास्त्री ने कहा कि यह बजट “कागजी विकास” का उदाहरण है, जिसमें वादों की भरमार है, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य है। प्रदेश का वास्तविक विकास विज्ञापनों से नहीं, बल्कि जनहित और पारदर्शी नीतियों से संभव है।