भारतीय जनता पार्टी झुग्गी झोपड़ी प्रकोषथ के जिला संयोजक मनोज निर्वानी ने प्रेस नोट के मध्यम से बताया की
बिरसा मुंडा एक महान आदिवासी नेता, क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे जिन्होंने 19वीं सदी में अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वह मुंडा जनजाति के सदस्य थे और उनका जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के उलिहातु गाँव में हुआ था।
बिरसा मुंडा की उपलब्धियाँ
-उलगुलान आंदोलन _बिरसा मुंडा ने अंग्रेज़ों के खिलाफ उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य आदिवासियों की भूमि और अधिकारों की रक्षा करना था।
-आदिवासी अधिकारों की लड़ाई _बिरसा मुंडा ने आदिवासियों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और ब्रिटिश सरकार को आदिवासियों के हित में कई कानून बनाने के लिए मजबूर किया।
-समाज सुधार बिरसा मुंडा ने आदिवासी समाज में व्याप्त कुरीतियों और अंधविश्वासों के खिलाफ काम किया और आदिवासियों को शिक्षा और सामाजिक सुधार के लिए प्रोत्साहित किया।
बिरसा मुंडा की विरासत
बिरसा मुंडा की विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है और हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। झारखंड राज्य का गठन भी उनके जन्मदिन 15 नवंबर को ही हुआ था। बिरसा मुंडा की कहानी हमें सिखाती है कि साहस, संघर्ष और समर्पण के साथ हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं।
नमन
बिरसा मुंडा को उनकी जयंती पर नमन और श्रद्धांजलि। उनकी विरासत और आदर्शों को याद करते हुए, आइए हम उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प लें और समाज के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास करें।