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ट्रेनिंग के नाम पर बड़ा खेल _मृत शिक्षक को भी जारी हुआ आदेश, बीआरसी भवन छोड़ गृहग्राम लोहझर में प्रशिक्षण — उठे गंभीर सवाल

शशिकांत सनसनी छत्तीसगढ़ 

गरियाबंद —कक्षा छठवीं के नए पाठ्यक्रम के लिए आयोजित पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण ने छुरा विकासखंड के शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशिक्षण की जिम्मेदारी बीआरसी छुरा को दी गई थी और इसे ब्लॉक मुख्यालय स्थित बीआरसी प्रशिक्षण भवन में आयोजित किया जाना था—लेकिन आश्चर्यजनक रूप से प्रशिक्षण को सरकारी सुविधाओं को दरकिनार करते हुए ग्राम लोहझर के नवीन हाई स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया।

यह निर्णय इसलिए विवादों में है क्योंकि छुरा मुख्यालय में बीआरसी भवन, मंगल भवन, सांस्कृतिक भवन सहित कई उपयुक्त स्थान उपलब्ध थे। इसके बावजूद प्रशिक्षण को लोहझर ले जाना, स्थानीय स्तर पर चर्चा को हवा दे रहा है कि संबंधित अधिकारी का गृहग्राम लोहझर होने के कारण प्रशिक्षण वहीं आयोजित किया गया।

आदेश सूची में मृत शिक्षक का नाम

मामला तब और गंभीर हो गया जब प्रशिक्षण के लिए जारी लगभग 90 शिक्षकों की सूची में सरकड़ा विद्यालय में पदस्थ रहे स्वर्गीय शिक्षक नीलकंठ साहू का नाम भी शामिल पाया गया।
नीलकंठ साहू का साल 2024 में आकस्मिक निधन हो चुका है।
यह चूक न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि दिवंगत शिक्षक के प्रति असंवेदनशीलता भी प्रदर्शित करती है।

दूसरे जिले में पदस्थ शिक्षिका को भी बुलाया गया प्रशिक्षण में

आदेश में एक और स्पष्ट त्रुटि सामने आई है। अनीता रवि, जो वर्तमान में जगदलपुर (जिला बस्तर) में पदस्थ हैं, उन्हें भी छुरा ब्लॉक के प्रशिक्षण में शामिल होने का निर्देश जारी किया गया है।
यह इस बात का संकेत है कि प्रशिक्षण आदेश बिना किसी सत्यापन, पुराने और गलत डाटा के आधार पर जारी किए गए।

क्या बीआरसी के पास अद्यतन डाटा ही नहीं?

अब बड़ा सवाल यह है —

क्या बीआरसी छुरा के पास शिक्षकों का अप-टू-डेट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है?यदि रिकॉर्ड मौजूद है, तो मृत शिक्षक और दूसरे जिले में पदस्थ शिक्षिका के नाम कैसे शामिल हो गए?

क्या यह महज लापरवाही है, या पूरा मामला संदिग्ध निर्णय प्रक्रिया का परिणाम है?

शिक्षक संघ और आमजन आक्रोशित
पूरे प्रकरण को लेकर शिक्षक समुदाय और आमजन में नाराजगी है।
मांग की जा रही है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भविष्य में ऐसी गंभीर चूक दोबारा न हो।

 

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