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बीबी के मौत का कृष्णा अस्पताल से पति ने लिया 3 लाख रुपए मुआवजा

शशिकांत सनसनी राजनांदगांव छत्तीसगढ़

 

कृष्णा अस्पताल प्रबंधक ने मृतक के पति को दिया तीन लाख रुपए का चेक, मृतक के पति ओमकार पटेल ने लिखित आवेदन देकर शिकायत लिया वापस, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारियों के समझ हु समझौता, मौत की कीमत तीन लाख रुपए हुआ तय
बीबी के मौत का कृष्णा अस्पताल से पति ने लिया 3 लाख रुपए मुआवजा,प्रशासन के अधिकारियों के मौजूदगी में हुआ महिला के मौत का सौदा ,4 घंटे तक महिला के शव को नेशनल हाईव पर रख कर चला हाई प्रोफाइल ड्रामा तीन लाख रुपए में महिला की मौत का सौदा, मौत पर हुआ राजनीति, कार्यवाही के बदले 3 लाख में समझौता

 

शहर के कृष्णा हॉस्पिटल में शुक्रवार को उस समय हंगामा हो गया, जब मृतक महिला के परिजनों ने घेराबंदी करते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि 31 अगस्त को कृष्णा हॉस्पिटल ने सही इलाज नहीं किया और मरीज को रेफर कर दिया गया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रेफर होने के बाद महिला को संजीवनी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां तीन दिन तक इलाज चलता रहा और आखिरकार उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद परिजन केवल कृष्णा हॉस्पिटल पर ही हंगामा कर रहे हैं, जबकि मौत संजीवनी हॉस्पिटल में हुई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जांच एकतरफा नहीं होनी चाहिए। यदि मरीज की जान गई है तो यह देखना जरूरी है कि संजीवनी हॉस्पिटल में तीन दिन तक किस तरह का उपचार दिया गया। केवल कृष्णा हॉस्पिटल को कठघरे में खड़ा करना मामले की सच्चाई को अधूरा छोड़ देगा।

 

प्रशासन ने कृष्णा हॉस्पिटल से रिपोर्ट तलब की है, लेकिन अब यह सवाल तेज़ी से उठ रहा है कि संजीवनी हॉस्पिटल की भूमिका की जांच से परदा क्यों डाला जा रहा है। निष्पक्ष जांच तभी संभव होगी, जब दोनों अस्पतालों की जिम्मेदारी तय की जाए। लेकिन वहीं सरोज पटेल जिनकी इलाज के दौरान मौत हुई उनके पति ओमकार पटेल मेरगांव निवासी अपने परिजनों के साथ जोहार छत्तीसगढ़, जोगी कांग्रेस,फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर के पदाधिकारियों अपने कार्यकर्ताओं के साथ महिला का शव को नेशनल हाईव पर रख कार्यवाही और मुआवजे पर अड़े है वहीं पत्रकार भी मौजूद रहे और पीड़ित परिवार की आवाज को अपने चैनल, अखबार में माध्यम से शासन प्रशासन तक पहुंचने का काम किया लेकिन 4 से 5 घंटे घंटे चली हाई प्रोफाइल ड्रामा के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के मौजूदगी पर परिजन और कृष्णा अस्पताल प्रबंधन की एक डील हुआ जिसमें तीन लाख रुपए नगद और बच्चे का इलाज जिसमें तीन मृत महिला का पति ओमकार पटेल से कृष्णा अस्पताल प्रबंधक ने लिखित आवेदन लिया जिसमें अस्पताल पर कोई कार्यवाही नहीं चाहता उसके एवज पर अस्पताल प्रबंधक ने तीन लाख का चेक मृतक के पति को दिया उसके बाद परिजनों का जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी का आंदोलन हुआ और तीन लाख के चेक लेने के बाद मृतक महिला के शव को लेकर अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए लेकर गए
जिनका पत्नी की इलाज दौरान मौत हुई उनको मिल गया तीन लाख अब लापरवाही पर अस्पताल पर कोई कार्यवाही नहीं होगी मतलब साफ है जब कोई घटना होती है या अस्पताल में मरीज की मौत होती है तो मीडिया के आने के बाद परिजनों और राजनीतिक पार्टियों को लाभ तो मिल जाता है और उस समय मीडिया को धन्यवाद बोलने का समय नहीं होता वही अगर पीड़ित लोगो का खबर दिखने के बाद प्रशासन कार्यवाही नहीं होता तो मीडिया खराब अगर वही परजिन को मुवाअजा मिल जाता है तो मीडिया को भुल कर संबंधित पर कर कार्यवाही नहीं चाहते

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