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न्यू लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई बसंत पंचमी, माँ सरस्वती के चरणों में अर्पित हुई ज्ञान-आराधना

न्यू लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई बसंत पंचमी, माँ सरस्वती के चरणों में अर्पित हुई ज्ञान-आराधना

बैकुंठपुर।ज्ञान, विद्या, विवेक और कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की आराधना का पावन पर्व बसंत पंचमी न्यू लाईफ हेल्थ एण्ड एजुकेशन सोसायटी द्वारा संचालित न्यू लाईफ इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग महाविद्यालय में श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर नजर आया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था प्रमुख डाॅ. प्रिंस जायसवाल एवं संस्था सचिव श्रीमती वंदना जायसवाल द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती के साथ किया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों तथा छात्र-छात्राओं ने क्रमशः माँ सरस्वती की आरती कर अपने जीवन में ज्ञान, विवेक, सद्बुद्धि और सदाचार की कामना की।

बसंत पंचमी को भारतीय संस्कृति में नवचेतना, सृजन और विद्या के आरंभ का पर्व माना जाता है। माँ सरस्वती को वाणी, संगीत, साहित्य, विज्ञान और बौद्धिक चेतना की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि माँ की आराधना से मनुष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर होता है और ज्ञान का प्रकाश प्रकट होता है। इसी भाव के साथ महाविद्यालय परिवार ने माँ सरस्वती के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

विधिवत पूजा एवं आरती के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया तथा भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं स्टाफ ने सहभागिता की। पूरे आयोजन में अनुशासन, समरसता और सांस्कृतिक मूल्यों की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

संस्था प्रमुख डाॅ. प्रिंस जायसवाल ने इस अवसर पर कहा कि “शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण और सेवा भावना का माध्यम है। माँ सरस्वती की आराधना हमें जीवन में सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।” वहीं सचिव श्रीमती वंदना जायसवाल ने कहा कि “नर्सिंग जैसे सेवा प्रधान क्षेत्र में ज्ञान के साथ-साथ संवेदनशीलता और संस्कार भी आवश्यक हैं, जिनका मूल आधार हमारी संस्कृति है।”

समारोह ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि छात्र-छात्राओं में संस्कार, अनुशासन और सांस्कृतिक चेतना का संचार भी किया। बसंत पंचमी का यह आयोजन महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक वातावरण को और अधिक समृद्ध करने वाला सिद्ध हुआ।

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