राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में राजनांदगांव की स्वास्थ्य सेवाओं की सकारात्मक तस्वीर, सर्वेक्षण के आकड़े जारी।
* मातृ स्वास्थ्य, स्वास्थ्य सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण एवं शिशु स्वास्थ्य के अनेक संकेतकों में उल्लेखनीय प्रगति।
वहीं 99.4 प्रतिशत परिवारों में बैंक अथवा डाकघर खाता पाया गया है। मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है। एनएफएचस-6 के अनुसार 99.4 प्रतिशत माताओं को कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच जांच प्राप्त हुई, जबकि 85.1 प्रतिशत माताओं ने कम से कम चार एएनसी विजिट पूरी की। प्रथम तिमाही में एएनसी जांच प्राप्त करने वाली माताओं का प्रतिशत 79.8 से बढ़कर 83.4 प्रतिशत हुआ है। गर्भावस्था के दौरान 100 दिन या उससे अधिक आयरन-फोलिक एसिड सेवन करने वाली माताओं का प्रतिशत 52.7 से बढ़कर 81.1 प्रतिशत, जबकि 180 दिन या उससे अधिक सेवन का प्रतिशत 28.1 से बढ़कर 59.6 प्रतिशत हुआ है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता है। 10 वर्ष या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 38.9 से बढ़कर 45.5 प्रतिशत तथा इंटरनेट का उपयोग कर चुकी महिलाओं का प्रतिशत 31.6 से बढ़कर 57.0 प्रतिशत हुआ है। स्वयं उपयोग करने वाले बैंक व बचत खाते वाली महिलाओं का प्रतिशत 95.3 प्रतिशत तथा स्वयं उपयोग करने वाला मोबाइल फोन रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 50.4 प्रतिशत दर्ज हुआ है। बाल स्वास्थ्य एवं टीकाकरण में भी जिले की स्थिति महत्वपूर्ण है। एनएफएचस -6 के अनुसार 12-23 माह के 84.2 प्रतिशत बच्चे पूर्ण टीकाकृत पाए गए।
इस आयु वर्ग में पोलियो की तीन खुराक 90.5 प्रतिशत, पेंटावेलेंट की तीन खुराक 89.7 प्रतिशत तथा एमसीवी की पहली खुराक 92.2 प्रतिशत बच्चों को प्राप्त हुई। अधिकांश बच्चों का टीकाकरण सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में हुआ। शिशु पोषण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय सुधार यह है कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने वाली माताओं का प्रतिशत एनएफएचस -5 के 20.1 प्रतिशत से बढ़कर एनएफएचस -6 में 61.5 प्रतिशत हुआ है। जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण, परिवार कल्याण तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों को और मजबूत करते हुए शेष चुनौतीपूर्ण संकेतकों में सुधार के लिए भी निरंतर कार्य किया जा रहा है।