भारयीय किसान संघ किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर आज 30 अक्टूबर को पूरे छत्तीसगढ़ के सभी जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपे । प्रदेश में अभी इस समय कम अवधि में पकने वाली धान की किस्मों की कटाई जोरों पर है। ऐसे में किसानों का धान मंडियों में बेचने के लिए तैयार हो जायेगा उन किसानों को धान सुरक्षित रखने बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा और किसान अपने धान को कोचियों एवं बिचौलियों को औने पौने दाम पर बेचने विवश होगा एवं मौसम खराब होने की स्थिति में धान खराब होने की भी आशंका बनी रहेगी इन सभी दिक्कतों को देखते हुए देखते हुए भारतीय किसान संघ ने छत्तीसगढ़ सरकार से धान खरीदी 1 दिसंबर की बजाय 15 नवंबर से करने की मांग रखी है।
इसके साथ ही प्रदेश के कुछ भागों में मक्के की खेती की जाती है और सरकार खरीफ में मक्के की खरीदी भी करती है परंतु इसकी खरीदी बहुत विलंब से प्रारंभ की जाती है ऐसी स्थिति में बस्तर एवं सरगुजा संभागों के किसान अपनी मक्के की फसल कम दामों में व्यापारियों को बेचनी पड़ती है इससे किसानों का बहुत अधिक नुकसान होता है। इसे देखते हुए मक्का खरीदी भी धान खरीदी के साथ ही प्रारंभ की जाए।
केन्द्र सरकार ने केन्द्रीय पूल में चावल लेने की सीमा बढ़ाई है उसके अनुसार प्रदेश में धान खरीदी की सीमा 15 क्विंटल से 20 क्विंटल किये जाने की आवश्यकता है। इसके साथ ही पिछले वर्ष किसानों को धान बेचने के समय बारदानों की दिक्कतों का सामना करना पड़ा है सरकार ध्यान दें की इस वर्ष बारदानों की दिक्कत ना हो। पंजीयन में साफ्टवेयर की गड़बड़ी के कारण बहुत से किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है। इसे देखते हुए पंजीयन की तिथि 10 नवंबर तक बढ़ाई जाए।
