…जितेंद्र जायसवाल,सुनील नामदेव, किरीट ठक्कर सहित 10 पत्रकार अब होंगे केंद्र व राज्य सरकार से सम्मानित…
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री भारत सरकार के समक्ष, छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हुये फर्जी एफआईआर की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठी
रायपुर: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस शासन के दौरान जनता की आवाज बनने वाले पत्रकारों को पिछली कांग्रेस की सरकार द्वारा कुचलने का भरपूर प्रयास किया गया, प्रदेश में की कांग्रेस सरकार में जो भय एवं आतंक का माहौल था, उसमें पत्रकारों पर झूठे मुकदमें और जानलेवा हमले हुये है। यहां तक कि न्यायायिक अभिरक्षा में भी पत्रकारों पर जानलेवा हमला होता रहा है, पत्रकारों में कांग्रेस सरकार के कारण भय का माहौल लगातार व्याप्त होता रहा।
आपको बता दे की छत्तीसगढ़ प्रदेश के क्रांतिकारी पत्रकारों में से सरगुजा से जितेंद्र कुमार जायसवाल तथा रायपुर के सुनील नामदेव ,कांकेर के स्व. सुशील शर्मा जैसे पत्रकारों पर झूठे मुकदमें गढ़े गये एवं आज भी इनकी जान को खतरा है। जितेंद्र कुमार जायसवाल पर तो 11 झूठे मुकदमें एवं न्यायिक अभिरक्षा में जानलेवा हमला सहित, जमानत से छूट कर आने के बाद भी जानलेवा हमला हो चुका है , किन्तु पुलिस ने किसी भी जानलेवा हमले पर एफआईआर तक दर्ज नहीं की है।
इस सूची में जितेंद्र कुमार जायसवाल अंबिकापुर, सुनील नामदेव रायपुर, स्व० सुशील शर्मा कांकेर,संजीत यादव कुनकुरी, शिव कुमार चौरसिया वाड्रफनगर, रौशन बघेल कवर्धा, रामहरी गुप्ता वाड्रफनगर, “छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़” के पत्रकार किरीट ठक्कर गरियाबंद, दिनेश सोनी रायपुर, निलेश शर्मा रायपुर ,आदि के नाम अंकित है।
