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समितियां किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने में विफल

समितियां किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने में विफल, केसीसी में 40% वस्तु की अनिवार्यता समाप्त करने की उठी मांग

किसानों की एकता में सामाजिक और राजनीतिक संगठन सबसे बड़ी बाधा है जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के नगपुरा मंडल का सम्मेलन ढाबा में सम्पन्न, पारख के संरक्षण में कमेटी का गठन

छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन का नगपुरा मंडल स्तरीय सम्मेलन ढाबा में सम्पन्न हुआ, सम्मेलन में शामिल किसानों ने खरीफ सीजन शुरू हो जाने के बाद भी समितियों में जरूरी खाद और बीज की अनुपलब्धता पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब समय पर किसानों को खाद और बीज नहीं दे सकते तब ऐसी स्थिति में केसीसी में 40% वस्तु लेने की अनिवार्यता समाप्त करके पूरी राशि नगद दिया जाना चाहिये ताकि किसान खुले बाजार से समय पर खाद और बीज खरीद सके, किसानों ने यह भी कहा कि वस्तु की अनिवार्यता का अनुचित लाभ उठाकर सरकार मर्जी के बिना किसानों को जैविक खाद थमा रही है।

सम्मेलन का मार्गदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के एड. राजकुमार गुप्त, आई के वर्मा, उत्तम चंद्राकर, परमानंद यादव, बाबूलाल साहू और ढालेश साहू ने कहा कि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में सरकार किसानों के धान और गेंहूं का एक एक दाना खरीदती है क्योंकि वहां के किसान संगठित हैं जबकि छत्तीसगढ़ के किसान राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों में विभाजित हैं।

यदि किसान संगठित होते तब प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान की खरीदी कम करके 15 क्विंटल करने में सरकार कामयाब नहींं हुई होती, संगठन के नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा धान के समर्थन मूल्य में प्रति क्विंटल 100/- की वृद्धि को नाकाफी बताते हुए कहा कि मोदी सरकार को स्वामिनाथन आयोग से लाहत मूल्य सी2+50% के फार्मूले से एमएसपी घोषित करने का वायदा पूरे करना चाहिये।

 सम्मेलन में किसान न्याय योजना की राशि दो गुना करने और समितियों का तत्काल चुनाव कराने की मांग उठाई गई

सम्मेलन में संगठन की नगपुरा मंडल कमेटी का गठन किया गया, ढाबा के पारखमणि साहू को संरक्षक बनाया गया, अध्यक्ष अंजोरा के विनोद देशमुख, उपाध्यक्ष खुर्सीडीह के देवसरण साहू, सचिव नगपुरा के पुकेश्वर साहू, सह सचिव दमोदा के लोकेश यादव और कोषाध्यक्ष ढाबा के कमल साहू को बनाया गया, सम्मेलन में पुरूषोत्तम बाघेला, प्रमोद पवांर, संतु पटेल के अलावा अनेक गांव के किसान शामिल थे ।

 

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