दुर्ग/ नौकरी पाने के लिए तो बेरोजगार महिला/पुरुष कई मिन्नते करेंगे नियमों की ईमानदारी से पालन करने की बात करेंगे.एप्रोज लगाएंगे और फिर नौकरी मिलने के कुछ महीनों बाद न जाने क्यों अपनी आदते बदल डालते है और काम को महत्त्व न देकर फिजूल कार्य को जानबूझकर पेसा बना लेते है।
ठीक ऐसा ही कुछ ऐसे कर्मचारियों को देखा जा सकता है जो सिर्फ मोबाईल लेकर बतियाने निकलते है, मोबाईल फोन पर व्यस्त सफाई कर्मी अपने पांव जमीन पर रखना भी नागवार समझते हैं। गाड़ी का ड्राइवर तो ईमानदारी से अपना ड्यूटी करता है, लेकिन सफाई कर्मी एक दिन, दो दिन नही बल्कि इनका रोज की बात हो गई हैं । ऐसा लगता है जैसे नगर पंचायत, नगर निगम ऐसे सफाई कर्मियों को सिर्फ मोबाईल फोन पर बतियाने के लिए ही काम पर रखा हो।
बतादे की घर की कामकाजी महिलाएं सुबह घर के काम में व्यस्त हो जाती है जैसे बच्चों के स्कूल की तैयारी, पति के ड्यूटी-काम में जाने के लिए टिफिन व्यवस्था में लग जाती है जिसके कारण वे महिलाए अपने घरों की कचरे की डिब्बा/बाल्टी को घर के बाहर रख देती है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में सफाई कर्मियों को इस तरह से अक्सर देखा जा सकता है की वे कचरे के डिब्बों को उठाने से ज्यादा फोन पर बतियाने को ज्यादा महत्त्व देते है।
वही इनकी शिकायत यदि विभाग के अधिकारी या बाबुओं से करों तो ये बढ़िया बहना बना देते है की घर का फोन था तो बात तो करेंगे ही. लेकिन ऐसा कौन सी बात है जो काम के वक्त में एक दिन , दो दिन नहीं बल्कि रोज काम के समय में ही लगातार फोन पर लगे रहते है। महिला होने के नाते अधिकारी या बाबू ज्यादा इन पर सख्ती नहीं बरतते जिनका ये पूरा फायदा उठाते है. इनकी लापरवाही के चलते कई बार ईमानदार कर्मियों को डांट भी सुनना पड़ जाता है।
मित्रों अब यह देखना है कि क्या ऐसे कर्मी को नगर निगम या नगर पंचायत सिर्फ मोबाईल पर बतियाने गाड़ी में सैर सपाटे के लिए काम पर रखता है या सच में सफाई व्यवस्था की ओर गंभीरता से ध्यान भी देता है। हालांकि हमारे इस खबर से कुछ लोगों को बुरा भी लगेगा लेकिन जो सही पाया गया वही लिखा गया है।
