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विश्व व्यापार में समझौते के कारण आने वाले वर्षों में किसान और किसानी के लिये गंभीर संकट

विश्व व्यापार में समझौते के कारण आने वाले वर्षों में किसान और किसानी के लिये गंभीर संकट

जरूरत मंदों को आवास और पेंशन का लाभ दिलाने में केंद्र और राज्य की सरकारें विफल

केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा के बजट में 25 हजार करोड़ की कटौती का खामियाजा मजदूरों को भुगतना होगा

मनरेगा को कृषि कार्य से जोड़ने से मजदूरों और किसानों दोनों को लाभ होगा

दुर्ग ग्रामीण क्षेत्र में नियम कानून को ताक में रखकर सड़क चौड़ीकरण नाम पर तोड़ फोड़ से भारी तबाह

खाता विभाजन, नामांतरण आदि राजस्व मामलों में भारी भ्रष्टाचार

अण्डा में आयोजित छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के दुर्ग ग्रामीण परिक्षेत्रीय किसान सम्मेलन में खेती किसानी सहित आवास, पेंशन, मनरेगा में 100 दिनों का काम, राजस्व मामलों में व्याप्त भ्रष्टाचार सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बिना मुआवजा दिये आबादी क्षेत्र में तोड़ फोड़ की तबाही के मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा हुई, सम्मेलन में दुर्ग ग्रामीण के 30 से अधिक गांव के 300 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल हुए इनमें किसानों के अलावा बड़ी संख्या में मनरेगा मजदूर, आवास और पेंशन के आवेदक, तोड़फोड़ से प्रभावित ग्रामीण शामिल थे,
सम्मेलन में शामिल मनरेगा मजदूरों ने बताया कि उन्हें 50-60 दिनों का ही काम मिल पाता है जबकि कानून में 100 दिनों का काम देने और न दे सकने की स्थिति में भत्ता देने का प्रावधान है, राज्य के बजट से एक दिन का भी काम नहीं मिला है जबकि वायदा 50 दिनों का काम देने का किया गया है,
अनेक ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने आवास के लिये आवेदन दिया है सूची में नाम भी है मगर दो तीन साल में भी उन्हें आवास नहीं मिल पाया है, इसी प्रकार कुछ अन्य ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सम्मेलन में बताया कि उन्होंने पेंशन के लिये आवेदन जमा किये हैं वे जरूरत मंद भी हैं किंतु उनके आवेदन इसलिये खारिज किये गये हैं कि उनके नाम 2001 या 2011 की सूची में दर्ज नहीं हैं
सड़क चौड़ी करण के नाम पर प्रचलित आबादी के तोड़ फोड़ से प्रभावित ग्रामीणों ने बताया कि अधिकांश के पास शासन का पट्टा है फिर भी लोक निर्माण विभाग द्वारा उन्हें अतिक्रमण कारी बताकर कब्जा छोड़ने की नोटिस देकर अपमानित किया गया और तोज़ फोड़ करके कब्जे से बेदखल कर दिया गया, तोड़़ फोड़ के कारण कुछ ऐसे भी पीड़ित हैं जिनके समक्ष आवास का तत्काल संकट उत्पन्न हो गया है,
सम्मेलन में उपस्थित किसानों और ग्रामीणों को छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के राजकुमार गुप्त, आई के वर्मा, झबेंद्र भूषण दास वैष्णव, उत्तम चंद्राकर, ढालेश साहू, आत्माराम साहू, लता चंद्राकर आदि के अलावा भारतीय किसान यूनियन के प्रवीण सिंह ने संबोधित किया, किसान संगठन के नेताओं ने आगाह किया कि विश्व व्यापार संगठन में समझौते के कारण कृषि के सब्सिडी समाप्त होने का खतरा है जिसके कारण आने वाले कुछ साल में खेती किसानी करना दुरूह हो जाने वाला है, संगठन के नेताओं ने केंद्र की भाजपा और राज्य की कांग्रेस सरकारों को निशाने में लेते हुए कहा कि केंद्र ने मनरेगा के बजट में 25 हजार करोड़ की कटौती किया है जबकि 50 दिनों का काम देने का दावा करने वाली बघेल सरकार नें मनरेगा के बजट में कोई प्रावधान ही नहीं रखा है, उन्होंने कहा कि यदि मनरेगा को कृषि कार्य से जोड़ दिया जाये तब 200 दिनों का काम मजदूरों को दिया जा सकता है इससे किसानों और मजदूरों दोनों को ही लाभ मिल सकता है,
किसान संगठन के नेताओं ने आवास और पेंशन की समस्या के लिये केंद्र और राज्य की सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पर्याप्त बजट से सभी जरूरत मंदों को आवास उपलब्ध कराया जा सकता है इसी प्रकार सूची में नाम होने की अनिवार्यता समाप्त करके सभी जरूरत मंदों को पेंशन दिया जा सकता है किंतु दोनों सरकारों में ऐसा करने की ईच्छा शक्ति नहीं है, किसान नेताओं नेे सड़क चौड़ी करण में तोड़फोड़ से प्रभावितों के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन के अलावा उचित मुआवजे के लिये संघर्ष करने की बात कही,
नांगर की पूजा करके और छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र में माल्यार्पण करने सम्मेलन आरंभ हुआ, सम्मेलन को सफल बनाने में तुलाराम देशमुख, छन्नू गजपाल, दीपक साहू, बालाराम साहू, प्रेम निषाद, रीना देशमुख, अशोक चौधरी, राकेश कौशिक आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही है ।

 

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