Site icon Chhattisgarh 24 News : Daily Hindi News, Chhattisgarh & India News

बहनो ने तिलक लगाकर बांधी भाइयों की कलाई पर राखी, भाइयों ने लिया संकल्प

✍️जिला संवाददाता विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद 

गरियाबंद- भाई बहन के अटूट स्नेह का पर्व रक्षाबंधन गुरुवार को हर्ष उल्लास और परंपरा पूर्वक मनाया गया। हर वर्ष की तरह सावन पूर्णिमा की तिथि पर बहनों ने रक्षा सूत्र से भाइयों की कलाइयां सजाई ।रेशम की डोरी के धागे भले ही कच्चे हो लेकिन इसके पीछे का स्नेह अटूट और बेहद मजबूत होता है ।बहन-भाई के प्यार का प्रतिक इस त्योहार को लेकर घर-घर में व्यापक तैयारियां की गई थी। रविवार की सुबह लोग स्नान कर देवी देवताओं की पूजा अर्चना किया। इसके उपरांत बहनों ने भाइयों की कलाई में रक्षा सुत बांधकर जन्म जन्म तक सुख-दु:ख में साथ निभाने का वचन भाईयों से लिया। वहीं भाईयों ने भी बहनों को उपहार देकर हमेशा साथ निभाने का वादा किया। इस दौरान मुंह मीठा करने का दौर भी जारी रहा।

घर के बुढे- बुजुर्गों का पैर छुकर आशिर्वाद लिया। दोपहर में अधिकांश बहनों ने भाई की कलाई पर राखी सजाई और उपहार पाकर अपनों के साथ खुशियां मनाई सुबह से शुरू हुआ इन्हीं भावनाओं के साथ सुबह से ही तैयारी कर रही बहनों ने भाइयों के हाथों में राखियां बांधी ।

भारतीय हिंदू संस्कृति में सभी रिश्तो को महत्व देने के लिए कई पर्व मनाए जाते हैं ।भाई दूज के साथ रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहन के अनूठे संबंध को और गहरा करने का पर्व है। भारत में रक्षाबंधन को लेकर पौराणिक और ऐतिहासिक परंपरा रही है। कहा जाता है की असुर देवता संग्राम में इंद्र को उनकी पत्नी इंद्राणी ने अभिमंत्रित रेशम का धागा बांधा था जिसकी शक्ति से वे विजयी हुए। भगवान श्री कृष्ण को द्रौपदी द्वारा उनके घायल उंगली में साड़ी की पट्टी बांधने को भी रक्षाबंधन से जोड़कर देखा जाता है।

उसी परंपरा का पालन करते हुए इस गुरुवार को बहनों ने सुबह से उपवास रखकर स्नान और श्रृंगार किया। खुद सज धज कर बहनों ने थाल सजाई। जिसमें राखियों के साथ रोली हल्दी चावल दीपक मिठाई आदि रखा। भाइयों को टीका लगाकर उनकी आरती उतारी गई और उनकी दाहिनी कलाई पर राखी बांधी गई। भाइयों ने रक्षा का वचन देते हुए बहनों को उपहार प्रदान किए। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में रक्षाबंधन को लेकर एक सा उत्साह नजर आया। तमाम आधुनिकताओं के बावजूद आज भी भारतीय परंपराओं पर अटूट विश्वास की झलक ऐसे ही पर्व पर नजर आती है। सभी भाई और बहनों को वर्षभर इसकी प्रतीक्षा होती है।

रक्षाबंधन के शुभमुहूर्त को ले कर क्या कहते है ज्योतिष

ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष रक्षाबंधन का त्योहार गुरुवार 11 अगस्त (गुरुवार) के दिन है. लेकिन, इस दिन सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर भद्रा लग जाएगी. बता दें कि मान्यतानुसार इस समयकाल में राखी नहीं बांधी जाती क्योंकि भद्रा को रक्षाबंधन का शत्रु माना जाता है. लेकिन, भद्रा पाताल लोक में होगी जिसका 11 तारीख पर कुछ खासा असर नहीं पड़ेगा और शुभ कार्य बाधित नहीं होंगे.

हालांकि, भद्रा के डर से लोग एकमत में नहीं आ रहे हैं. वैसे भद्रा अगले दिन सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगी. भद्रा के चलते ही लोग 12 अगस्त के दिन राखी बांधने की योजना बना रहे हैं लेकिन 11 अगस्त के दिन भी तीन शुभ मुहूर्त हैं जिनमें राखी बेझिझक बांधी जा सकती है.

राखी बांधने का शुभ मुहुर्त

, गुरुवार के दिन रक्षाबंधन का शुभ मुहुर्त ज्योतिषनुसार दोपहर 12 बजकर 53 मिनट पर है. यह अभिजीत मुहूर्त है. इसके अलावा दोपहर 2 बजकर 39 मिनट से 3 बजकर 32 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा. आखिरी मुहुर्त शाम 6 बजकर 55 मिनट से 8 बजकर 20 मिनट का है. इसमें अमृत काल लगेगा. इस एक घंटे 25 मिनट के मुहुर्त में भी राखी बांधी जा सकती है.

Exit mobile version