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मैनपुर के पीयूष सबसे कम उम्र का वैज्ञानिक जाने कैसे

✍️ छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़ कॉम जिला प्रमुख रिपोर्ट सैयद बरकत अली गरियाबंद

अल्बर्ट आईंस्टीन का रिकॉर्ड तोड़कर गरियाबंद के पीयूष बने दुनिया के सबसे कम उम्र के वैज्ञानिक जिन्होंने आज राजधानी रायपुर पहूंच कर गरियाबंद जिला प्रभारी मंत्री अमरजीत भगत से खास मुलाकात किया और साथ में आदीवासी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव भी मौजूद रहे।

*3 जवान बेटी सहित पति पत्नी कोचर परिवार की दर्दनाक मौत*

*🎥 ब्यूरो रिपोर्ट “छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़”*

*👉बच्चियां चीखती रही चिल्लाती रही, मगर रात अधिक होने के कारण नही आया कोई कोचर परिवार को बचाने*

मैनपुर का 13 वर्षीय पीयूष जायसवाल दुनिया मे सबसे कम उम्र का साइंटिस्ट बन गया है। इससे पहले यह उपलब्धि महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आईंस्टीन के नाम थी। अल्बर्ट आईंस्टीन को 17 वर्ष की उम्र में साइंटिस्ट होने का प्रमाणपत्र मिला था। जबकि पीयूष 13 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल करने में कामयाब रहे।

दुनिया की सबसे बड़ी शोध संस्थाओं में से एक इंटरनेशनल जरनल्स ऑफ साइंटिफिक एंड इंजीनियरिंग (IJSER) ने पीयूष जायसवाल को यह प्रमाणपत्र जारी किया है। संस्था ने 01 मार्च को पीएचडी का प्रमाणपत्र भी पीयूष को जारी किया है। इसके अलावा पीयूष द्वारा किए गए शोध पर भी अपना वाटरमार्क लगा दिया है। ताकि कोई अन्य उस पर अपना दावा ना कर सके।

पीयूष का शोध

जिस उम्र में बच्चे ब्रम्हांड की कहानियां सुनते है उस उम्र में पीयूष ने ब्रम्हांड पर रिसर्च करना शुरू कर दिया है। पीयूष ने अपने शोध में पाया कि ब्रम्हांड का अंत निश्चित है। उन्होंने हबल थ्योरी का इस्तेमाल करते हुए बताया कि ग्रहों की दूरियां बढ़ती जा रही है। उन्होंने बताया कि एक समय के बाद ये सिकुड़ने लगेंगे। इस तरह गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ग्रह एक दूसरे को खींचकर तबाह कर देंगे।

20 पन्ने का शोध

पीयूष ने 6 महीने की कड़ी रिसर्च के बाद अपने 20 पन्ने के शोध को IJSER संस्था के पास भेजा था। संस्था ने शोध की कई चरणों मे बारीकी से जांच करने के बाद पीयूष के शोध को मान्यता प्रदान की है। 01 मार्च को संस्था ने पीयूष को पीएचडी की डिग्री में जारी कर दी है।

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