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बढ़ रहा है ट्रैफिक का दबाव : बाईपास अथवा फोरलेन की आवश्यकता है

जिला निर्माण के ग्यारह वर्षों बाद भी नगर की लचर व्यवस्था अब आम नागरिकों पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान गरियाबंद ग्राम पंचायत से नगर पंचायत और फिर अब नगर पालिका घोषित हुये भी कई साल बीत चुके हैं, किन्तु इस सामान्य प्रशासनिक उपखंड का उपयोग नागरिकों को सुविधा उपलब्ध कराने की बजाये, निजी महत्वाकांक्षा और स्वार्थपूर्ति के लिये अधिक हो रहा है ….

किरीट भाई ठक्कर, गरियाबंद। जिला निर्माण के ग्यारह वर्षों बाद भी नगर की लचर व्यवस्था अब आम नागरिकों पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान गरियाबंद ग्राम पंचायत से नगर पंचायत और फिर अब नगर पालिका घोषित हुये भी कई साल बीत चुके हैं, किंतु इस सामान्य प्रयोजन प्रशासनिक उपखंड का उपयोग नागरिकों को सुविधा उपलब्ध कराने की बजाये, निजी महत्वाकांक्षा और स्वार्थपूर्ति के लिये अधिक हो रहा है।
आम जनता को जिला मुख्यालय में सबसे बड़ी समस्या सड़क मार्ग को लेकर हो रही है।
वर्षों पुरानी टू लाइन सड़क में ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा है। नगर में बायपास रोड की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अब तक किसी भी जिम्मेदार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा भी शहर विकास को लेकर कोई मापदंड तैयार नहीं किया गया है।

रायपुर से देवभाेग की ओर जाने वाली नेशनल हाईवे 130 सी शहर के बीच से होकर गुजरती हैं। एक मात्र सड़क मार्ग पर माल वाहक और यात्री बसों के अलावा गरियाबंद जिले का स्थानीय आवागमन, साथ ही बहुत से प्रशासनिक कार्यालय इसी सड़क के दोनों ओर स्थित है।

नेशनल हाईवे सड़क मार्ग के किनारे संयुक्त जिला कार्यालय भवन है, इसके अलावा जिला पंचायत कार्यालय, भारतीय रिजर्व बैंक, जिला रोजगार कार्यालय ,जिला विपणन अधिकारी कार्यालय, पीडब्ल्यूडी विश्राम गृह, न्यू सर्किट हाउस, वन मंडल गरियाबंद कार्यालय, जनपद पंचायत कार्यालय उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व उप निदेशक कार्यालय, वन विभाग विश्राम गृह, लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, कृषि उपज मंडी, गुरुकुल कॉलेज ,आईटीएस कॉलेज, भूमि संरक्षण विभाग, हेलीपैड, वन काष्ठागार डिपो, और जिला सत्र न्यायालय, स्लाटर हाउस सहित साप्ताहिक बाजार भी अब लग रहा है।
इसी तरह रायपुर मार्ग में बस स्टैण्ड डाक घर, जिला सहकारी बैंक, सिटी कोतवाली, आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल, वीर सुरेन्द्र साय महाविद्यालय साथ ही बहुत से बैंक व पेट्रोल पंप संचालित है। इस प्रकार शहर के बीचों बीच सड़क मार्ग पर भारी दबाव रहता है। इस दबाव की वजह से ना सिर्फ सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, बल्कि अक्सर दुर्घटनाएँ घटती रही है।

शराब दुकानें भी एक बड़ा कारण

सबसे ज्यादा परेशानी शराब दुकान को लेकर है , यहां देशी और विदेशी शराब की दुकानें भी इसी मार्ग से जुड़ी हुई है। दिन हो या रात नशे में झूमते शराबी सड़क पर लहराते गरियाते मिल ही जाते हैं।

नेशनल हाईवे सड़क मार्ग में वाहनों के अलावा सरकारी सिस्टम भी इसी मार्ग में चल रहा है। आये दिन जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन रैली जुलूस का आयोजन होता रहता है। विभिन्न संघठनो, राजनैतिक दलों के आंदोलनकारी कलेक्ट्रेट तक शक्ति प्रदर्शन व दबाव बनाने रैली जुलूस भीड़ का हुजूम लेकर आते हैं। जिससे घंटो एन एच जाम की स्थिति बन जाती है। इस अघोषित चक्का जाम का खामियाजा आम नागरिकों उठाना पड़ता है। एम्बुलेंस ,फायर ब्रिगेड,108 जैसी आवश्यक सेवायें बाधित हो सकती है।

अभी हाल ही में विधान सभा चुनावों के नामांकन दाखिल करने के दौरान,बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशियों के समर्थकों को रोकने, प्रशासन ने नेशनल हाईवे सड़क मार्ग पर बेरिकेट्स लगा कर एन एच जाम कर दिया था। जिससे घंटो तक आवागमन बाधित रहा।
पिछले शुक्रवार साप्ताहिक बाजार में बढ़ी भीड़ की वजह से शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक नेशनल हाईवे पर आवागमन अवरुद्ध रहा।
ऐसा नहीं है कि इस तरह की समस्या पहली बार निर्मित हुई हो, सड़क मार्ग को लेकर परेशानी वर्षों से है। किन्तु प्रशासन व स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। नगर पालिका गरियाबंद के पास भी इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है।

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