‘प्रतिरोधक शक्ति का मुफ्त स्रोत हमारे ग्रामीण खेल’- डॉ. कस्तूरे
डॉ खूब चंद बघेल शा.स्नातकोत्तर महा.भिलाई-3 में ‘स्वामी विवेकानंद जयंती’ के उपलक्ष में ‘युवा महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत स्वदेशी खेलों पर पेंटिंग/पोस्टर निर्माण तथा प्रस्तुतीकरण का ऑनलाइन कार्यक्रम एनसीसी के द्वार किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अमृता कस्तूरे थी।
कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ अमृता कस्तूरे के संबोधन से हुआ।
डॉ. कस्तूरे ने अपने संबोधन में स्वामी विवेकानंद जी को याद करते हुए कहा कि किस तरह स्वामी जी ने अपने छोटे से 40 वर्ष के जीवन काल में विश्व में भारत का पताका फहरा दिया।
उनका मुख्य जोर युवाओं की शक्ति पर था कि युवा भारत के परंपराओं प्रथाओं वेद आदि के ज्ञान के महत्व को पहचाने एवं भारत को विश्व के गुरु के रूप में फिर से स्थापित करें।
डॉ.कस्तूरे ने अपने संबोधन में कहा हम सब ने बचपन में अनेक खेल खेले हैं।
ये खेल बिना जीत हार के मनोरंजन के साथ-साथ हमें अच्छे प्रतिरोधक शक्ति भी प्रदान करते थे। साथ ही हमारे नर्वस सिस्टम एवं मांसपेशियों को भी मजबूत बनाते थे।
ये हमारी क्षमता, सहनशीलता एवं मानसिक शक्ति को भी बढ़ाते थे। इन खेलों को खेलने के लिए किसी विशेष साधनों की आवश्यकता नहीं होती थी और अमीर गरीब हर कोई मिलकर इसे खेलते थे।
किंतु मोबाइल एवं मनोरंजन साधनों के विकास के साथ-साथ ये खेल लुप्त होते जा रहे हैं और बच्चे घर में बैठे-बैठे दिन-ब-दिन कमजोर होते जा रहे हैं।
हमारा कर्तव्य है और केडेट्स का समाज के प्रति दायित्व है कि वह इन खेलों को छोटे-छोटे बच्चों को हर दिन खेलाएं और हमारी धरोहरों की रक्षा करें।
प्राचार्य ने यह भी कहा कि परिस्थितियां जैसे ही सामान्य होती हैं तो हम इन खेलों का आयोजन भी अपने महाविद्यालय में करेंगे, ताकि हम इन खेलों को कुछ जान सकें और खेलों को अगली अगली पीढ़ी के लिए संरक्षित भी कर सकें।
कार्यक्रम में केडेट कुलेश्वर द्वारा कुश्ती, विवेक शाह द्वारा कबड्डी, नोमेश द्वारा पकड़म-पकड़ाई, स्मिता द्वारा हरेली त्यौहार एवं छत्तीसगढ़ के ग्रामीण खेलों, चांदनी द्वारा बिल्लस, पीकू साहू द्वारा नदी-पहाड़ आदि ग्रामीण खेलों पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलम गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में डॉ.श्रीकांत प्रधान तथा एनसीसी एसडी एवं एसडब्ल्यू के सारे केडेट ऑनलाइन जुड़े हुए थे।
