गरियाबंद । राज्य शासन ने प्रदेश में कृषि परिदृश्य को बदलने और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिये कृषक उन्नति योजना के नवीन स्वरूप को मंजूरी दी है। इस ऐतिहासिक नीति के तहत, अब खरीफ सीजन से परंपरागत धान की खेती छोड़कर वैकल्पिक फसलें उगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की इनपुट सहायता (आदान प्रोत्साहन राशि) प्रदान की जायेगी।
सरकार का यह कदम धान पर राज्य की पारंपरिक निर्भरता को कम करने, दलहन-तिलहन की उपलब्धता बढाने, जल संकट से निपटने और भूमि की सेहत सुधारने की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत माना जा रहा है।
कृषि विभाग के उपसंचालक चंदन राय ने बताया कि यदि कोई कृषक अपने पंजीकृत रकबे में धान के स्थान पर कम पानी वाली और उच्च मूल्य वाली फसलों का चयन करता है, तो उसे योजना का सीधा लाभ मिलेगा। इनमें शामिल की गई प्रमुख फसलें अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, कोदो, कुटकी,रागी (मोटा अनाज), मक्का,कपास आदि सहित अन्य फसल शामिल हैं।
सरकार ने योजना में पारदर्शिता और वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तंत्र (डिजिटल फसल सर्वेक्षण) को अनिवार्य किया है। सभी कृषको को एकीकृत किसान पोर्टल पर अपनी भूमि और प्रस्तावित फसल का समितियों के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा।
पंजीयन हेतु अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित है। डिजिटल फसल सर्वेक्षण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि किसान ने वास्तव में धान के बदले स्वीकृत फसल ही बोई है। एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे समस्त कृषक जो विगत खरीफ में धान फसल की खेती किये थे. जिन्होंने आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु पंजीयन कराया हो योजनान्तर्गत पात्र है। ट्रस्ट, मण्डल, प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी, शाला विकास समिति, केन्द्र, राज्य शासन की संस्थान, महाविद्यालय आदि को योजना से लाभ लेने की पात्रता नहीं होगी।
पूर्व से ही खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, कपास आदि की फसल लेने वाले कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबे को पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर पूर्ववत् राशि रुपये 10 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। साथ ही साथ पिछले कई वर्षो से अन्य फसलो के उत्पादक कृषक जो समितियो में पंजीकृत नही है वे किसान भाई वर्ष 2026-27 में समितियो के माध्यम से एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराकर 10 हजार रूपये प्रति एकड़ का लाभ कृषक उन्नति योजना अंतर्गत प्राप्त कर सकते है।
किसानों की फसल कास्त लागत की प्रतिपूर्ति रुपये 15 हजार प्रति एकड़ की यह बड़ी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जायेगी, जिससे वे उत्तम बीज और आधुनिक कीटनाशक खरीद सकेंगे। इस योजना का लाभ जिले के सभी छोटे-बड़े और सीमांत किसानों को मिलेगा, बशर्ते उनकी भूमि का वैध रिकॉर्ड दर्ज हो। आधार कार्ड, भूमि की खसरा नकल (बी-1 और पी-2), बैंक पासबुक (जिसमें डीबीटी सक्रिय हो) और चालू मोबाइल नंबर पंजीयन हेतु किसान अपने नजदीकी प्राथमिक कृषि सहकारी समिति, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या विकासखण्ड कृषि कार्यालय से संपर्क कर अपनी फसल प्रविष्टि में संशोधन करवा सकते हैं।
