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डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “राम राज्य से पहले प्रेम राज्य होना चाहिए”

CG24NEWS :― श्री राम राज्य की चर्चा इन दिनों जोरो पर है प्रमुख राजनैतिक दलों द्वारा राम राज्य लाने की बात की जाती है परन्तु राम राज्य से पहले प्रेम राज्य होना चाहिए।
विद्वानों का मत है कि राम राज्य की स्थापना उसी दिन हो गयी थी जिस दिन भगवान श्री राम राजसत्ता वैभव समस्त साधनों सुविधाओं को त्यागकर पथरीली व कंटीली राहो से वन की ओर प्रस्थान करते हैं, स्पष्ट है कि श्री राम का जी का राज्य प्रेम त्याग व समर्पण पर आधारित था ।मौजूदा परिवेश में निरंतर भोगवादी संस्कृति पनप रही है व राजनीति सत्ता केन्द्रित होती जा रही है,यानि पारिवारिक सामाजिक आर्थिक व राजनैतिक प्राय हर स्तर पर नैतिक मूल्यों की अवहेलना हुई है, ऐसे में राम राज्य की आशा करना मुश्किल प्रतीत होता है।
वर्तमान समय में राम राज्य की स्थापना के लिए शासक वर्ग के साथ प्रबुद्ध वर्ग व जनता को कठिन संघर्ष करने की जरुरत है, मौजूदा परिवेश में धार्मिक भ्रान्तियाँ वैचारिक कलुषता व राजनीतिक वैमनस्यता तेजी से बढ़ रहे हैं, इन्सानी जिन्दगीं एंव सामाजिक परिवेश मे कटुता एकता मे संकट पैदा कर रहा है, आज वर्तमान मे यही स्थिति है ।
वास्तव में सभी धर्म सत्य अहिंसा प्रेम न्याय भाईचारा व शान्ति की शिक्षा देते हैं फिर भी धर्म मजहब के नाम पर इतनी नफरत हिंसा मार काट मत मतान्तर व दहशत क्यो हो रहा है, धर्म के नाम पर मजहब के नाम पर लोग बेरहमी से लोगों को मारते हैं आगजनी करते हैं आतंकवाद फैलाते हैं उग्र प्रदर्शन करते हैं लेकिन जो ईश्वर को प्रेम करते हैं उनके द्वारा दूसरे ईश्वरीय अंश के प्रति ऐसा कर पाना कैसे सम्भव है, सहिष्णुता व सौहार्द्रता जड़ है सामाजिक जीवन की जिसे नकार कर हम समाज में सुख समृद्धि शान्ति व विकास की कल्पना कैसे कर सकते हैं, भारतीय संस्कृति भी उदारवादी है, यहाँ की संस्कृति अनेक जातियो के लोगों व अनेक प्रकार के विचारो के बीच संबंध स्थापित करता है विविधताओं एवं विभिन्नताओ के बीच एकता एवं सामंजस्य कायम करने की दृढ इच्छाशक्ति एवं साहस इसमें सदा से ही रहा है, श्री राम चरित मानस में श्री राम भरत मिलाप का प्रसंग पारिवारिक सामाजिक व रास्ट्रीय जीवन में प्रेम एकता व भाईचारे का सन्देश देता है, श्री राम जी का समग्र व समावेशी व्यक्तित्व समाज में विषमता को मिटा कर एक सूत्र में बन्धने व एकता समता और मिलजुलकर रहने की प्रेरणा देता है,सर्वोत्तम होगा कि राम राज्य का स्वरूप ऐसा हो जिसमें किसी मत विशेष की प्रधानता नही बल्कि नैतिकता पर आधारित एक ऐसा राज्य जिसमें धर्म जाति क्षेत्र लिङ्ग व भाषा आदि के आधार पर भेदभाव न हो, भगवान श्री राम सिद्धान्तों कर्तव्य निष्ठा और निष्पक्ष और न्याय पूर्ण उनके तरीकों को अपनाने से राम राज्य आ सकता है।
आपका
सेवाभावी शुभचिंतक बिजेन्द सिन्हा
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