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डॉ. बिजेन्द सिन्हा जी का संपादकीय लेख “नफरत को मिटाने से आएगी शान्ति”

CG 24 NEWS:- भेदभाव आतंक घृणा स्वार्थ व भय ग्रस्त परिवेश में गांधी जी के सत्य अहिंसा प्रेम एकता सद्भाव स्वतंत्रता समानता भातृत्व सामन्जस्य व सादगी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। गांधी जी सिर्फ देश की स्वतंत्रता ही नहीं बल्कि भारत सहित सम्पूर्ण विश्व मे स्वतन्त्रता समानता भातृत्व सत्य अहिंसा सत्याग्रह एवं मानव मूल्यों पर आधारित एक ऐसे समाज की स्थापना की जिसमें किसी के साथ धर्म जाति नस्ल आदि का भेदभाव न हो। अहिंसा के रूप में उन्होंने उज्जवल महान और नैतिक पथ निर्मित किया। वे अहिंसा के आधार से ही मनुष्य के जीवन सम्पूर्ण मानव समाज और जगत की व्यवस्था के लक्ष्य की कल्पना की।

गांधी जी की अहिंसा वीरता दृढता व धैर्य पर आधारित है जो अत्याचार व अनाचार को जगत की सारी शस्त्र शक्ति और द्वेष तथा दम्भ से युक्त व्यवस्था की सारी दमनात्मक प्रवृति को चुनौती देती है। उनका गहरा दृष्टिकोण था कि पशुता पर देवत्व की विजय तब होगी जब नैतिक और शुभ रूपी अस्त्रों से अनैतिक और दानव भाव की पराजय हो। उनकी अहिंसा नैतिकता पर आधारित है। गांधी जी ने अहिंसक क्रान्ति हिंसाहीन संघर्ष सत्य और अहिंसा का सहारा लेकर दमनकारी अन्ग्रेजी साम्राज्य को चुनौती दिया। उनहोंने साम्प्रदायिक सद्भाव व एकता के लिए आजीवन संघर्ष किया। देश के कुछ हिस्सों में आज भी कभी कभी भेदभाव व उन्माद देखने को मिलता है। वर्तमान समय में भी बंटते समाज असमानता और मतभेदों के इस दौर में गांधी जी के विचार आज भी प्रेरणीय है। हथियारों की अपेक्षा नफरत भेदभाव और घृणा जैसे विचार ज्यादा खतरनाक होते हैं। विभाजन कारी व कट्टरवादी सोच भारतीय एकता के लिए बाधक है। अतः गांधी जी के समन्वयकारी विचार प्रेरणीय है। मनुष्य के दूषित विचार घातक हथियारों से भी खतरनाक होते हैं। आज भी भेदभाव की वजह से कहीं कही जातिगत हिंसा देखने को मिलता है।
समाज में घृणा व वैमनस्य नहीं बल्कि सहानुभूति व सदभावना की अभिवृद्धि होनी चाहिए। नफरत का खून जिसकी रगों में दौड़ता है वो गान्धीजी के विचारों को मिटा देने का असफल प्रयास करते हैं। गांधी जी का दर्शन मानव जीवन व संसार के लिए नैतिक भाष्य है। वर्तमान समय में गांधीवाद का प्रदर्शन तो बहुत होता लेकिन गान्धीजी के विचारों को हम भुल रहे है। गांधी जी की आर्थिक नीति मे किसी को खाने और पहनने के लिए तरसना न पडे का भाव शामिल था। वे सम्पदा के असंतुलित आधार के विरूद्ध थे। गांधी जी की अहिंसा मे व्यापकता व समग्रता का बोध समाहित है जिसके करण विश्व के लिए प्रेरणीय है। इसी कारण संयुक्त राष्ट्र संघ ने अहिंसा दिवस मनाने की शुरुआत की। गांधी जी अपने जीवन के अन्तिम समय में अपने सहयोगियों से व देश की गतिविधियों को देख कर दुखी थे।
सत्य पर असत्य की विजय व अहिंसा जैसे नैतिक शक्ति से प्रकाश पूर्ण नेतृत्व किया। यही वह स्वप्न है जिसे गान्धीजी ने देखा व जिसे साकार करने का दायित्व हम सभी देश वासियों पर है।
शत शत नमन।
आपका शुभचिंतक बिजेन्द सिन्हा।

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