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जंग का आगाज.? यूक्रेन-रूस में तनाव से टेंशन में दुनिया, भारत और चीन का एक रुख

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने पूरी दुनिया को दोफाड़ कर दिया है। एक तरफ अमेरिका समेत तमाम नाटो देशों ने रूस की आक्रामक कार्रवाई की निंदा की है तो वहीं भारत और चीन जैसे बड़े राष्ट्रों ने इस पूरे विवाद पर तटस्थता बरती है। रूस ने इस तनाव के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को जिम्मेदार ठहराया है।

वहीँ संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजनयिक ने कहा कि अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने यूक्रेन को सैन्य कार्रवाई के लिए उकसाने का काम किया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग में सोमवार रात रूसी राजनियक वैसिली नेबेंजिया ने यूक्रेन पर आरोप लगाया कि उसकी ओर से लुहान्सक और डोनेत्सक इलाके में बम फेंके जा रहे हैं।



इन दोनों ही इलाकों को रूस ने यूक्रेन से अलग प्रांतों के तौर पर मान्यता दे दी है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन ने 1 लाख 20 हजार सैनिकों को पूर्वी यूक्रेन में तैनात किया है, जहां रूसी समर्थक अलगाववादी सक्रिय हैं। इस बीच जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों ने रूस की कार्रवाई का विरोध किया है। साउथ कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ने यूक्रेन की संप्रभुता का समर्थन किया।

राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों संग मीटिंग के बाद मून जे इन ने यूक्रेन विवाद के बीच आर्थिक सुरक्षा के मसले पर चर्चा की। जापान के पीएम फुमियो किशिडा ने रूस की निंदा करते हुए कहा कि उसने यूक्रेन की संप्रभुता से खिलवाड़ करने का काम किया है। यही नहीं उन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी है। उनका कहना है कि जापान रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों को लागू करने पर विचार करेगा।



इस बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मीटिंग में किसी एक पक्ष का समर्थन या विरोध करने की बजाय संयम बरतने की अपील की है। इसके अलावा चीन भी भारत की तरह ही कुछ भी टिप्पणी करने से बच रहा है। चीन का कहना है कि इस विवाद का हल यूएन चार्टर के तहत शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। यूएन में चीन के अंबेसडर झांग जुन ने कहा कि सभी पक्षों को शांति बरतने पर फोकस करना चाहिए और कूटनीतिक ढंग से विवाद हल करने पर काम होना चाहिए।
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन भी खुलकर यूक्रेन के समर्थन में आए हैं। उनका कहना है कि रूस को तत्काल पूर्वी यूक्रेन से पीछे हटना चाहिए, जहां उसने अपनी सेनाओं को भेजना का आदेश दिया है। न्यूजीलैंड ने भी यूक्रेन में रूसी कार्रवाई का विरोध किया है। इन देशों के अलावा जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश भी रूस के खिलाफ हैं।
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