छत्तीसगढ़ के बेटी
सिरीराम के माता कौशिल्या
१. कौशिल्या के पियारे रामजी,
जय रघुनंदन जय सिया राम।
छत्तीसगढ़ के भांजा राम जी,
अवध बिहारी सिता राम।।
२.पुरुषोत्तम सिरी राम के माता,
कौशल के बेटी के गुन गांव।
कौशल मा भानुमंत के दुलौरिन,
कौशिल्या के सुग्घर पांव,
३.रघुकुल राजा दशरथ के वीरता,
राजतिलक मा भानुमंत आय।
कौशिल्या ला दशरथ भाये,
तुरते बिहाव के बात हो जाय।
४.राजनीति मा कैकयी,सुमित्रा
बहिनी कौशिल्याकेमान बड़जाय
मइके सिहावा ले श्रृंगी रिसी हे,
पुत्रेष्ठि जग राजा कराय।।५.रामलला पाये कौशिल्या,
कैकयी भरत पाय भाग जगाय।
लखन शत्रुघ्न सुमित्रा पावे,
चारो पुत्र दशरथ हरसाय।।
६.गुरु वशिष्ठ ले शिक्षा पावे,
अस्त्र शस्त्र निपुन होई जाय।
जंगल मा बाधा राक्षस मन के,
विश्वामित्र ला संत गोहराय।।
७.राम लक्ष्मण करें जग के रक्षा,
धनुष बान ले मार भगाय।
ताड़का मारे मारीच भगाये,
अहिल्या के जीवन सिरजाय।।
८.विश्वामित्र संगे जनकपुरी मा,
सीता के स्वयंबर मा आय।
शिवधनुष रामजी तोड़े,
सीता वर माला पहिराय।।९.परशुराम के संका पिटावे,
कौशिल्या के चिंता दुरियाय।
राम सीता,लखन उर्मिला,
भरतमांडवीशत्रुहनश्रुतकीर्ति आय
१०.चौथापन मा दशरथ राजा,
रामके राजतिलक केतैयारी कराय
मंथरा केकई ला दुवचन बताये,
भरत राज राम वनवास रहाय।।
११.राम लखन सीता बन जाये,
केवंट गंगा पार रहे कराय।
चित्रकुट भरत मिलाप रहे,
अत्री अनुसुईया ले शिक्षा पाय।।
१२.दस बरस ले कौशल प्रदेश मा,
सुरपनखा रूप रहे दिखाय।
लखन नाक कान काटे,
खरदूसन मारे रावण गुस्साय।।१३.मारीच सोना मृग देखे,
सीता बर राम चले जाय।
लक्ष्मण रेखा ले धोखा से,
सीता माई ला रावण ले जाय।।
१४.जटायु के उद्धार करें,
शबरी के जूठा बोईर खाय।
राह जानके हनुमान जी मिले,
सुग्रीव भाई बाली मार गिराय।।
१५.जामवंत हनुमान ला जगाये,
लंका मा हनुमान के परीक्षारहाय
विभीषण बताये अशोक वाटिका,
मुंदरी देवे सीता के शोक मिटाय।
१६.फलखाये हनुमान वाटिका मा
अक्षय मारे मेंघनाथ बांध ले जाय।
रावन ला समझाये ना माने,
लंका दहन करके वापस आय।।१७.विभीषण ला रावण लात मारे,
शरणागत राज तिलक कराय।
रामसेतु बने लंका मा चढ़ाई,
रावन के वंश नाश हो जाय।।
१८.कौशिल्या के बेटा आ जाये,
रामराज्य अयोध्या हरसाय।
सीताराम के होये जयकारा,
माता कौशिल्या के गौरव बढ़ाय।।
नारायण चंद्रकर
गीता सदन
मैत्रिकुंज(भिलाई)
7587143257
