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घंटों तक एन एच जाम और कलेक्ट्रेट घेराव के बाद लौटे आंदोलनकारी ग्रामीण किसान , कहा फिर करेंगे कलेक्ट्रेट घेराव

राष्ट्रपति के नाम सौंपा मांगपत्र

गरियाबंद।किसान मजदूर संघर्ष समिति द्वारा कलेक्ट्रेट घेराव

किरीट भाई ठक्कर ,गरियाबंद। अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर किसान मजदूर संघर्ष समिति उदन्ती सीतानदी राजापड़ाव क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने आज कलेक्ट्रेट का घेराव करते हुये लगभग दिनभर एन एच 130 जाम कर दिया। मैनपुर विकास खंड के अंतर्गत आने वाले उदन्ती सीतानदी राजापड़ाव क्षेत्र के ग्रामीण आज सोमवार कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव करने मैनपुर क्षेत्र से एक दिन पहले ही निकल पड़े थे। 150 से अधिक ट्रेक्टरों पर सवार ग्रामीणों ने नगर से 12 किलोमीटर दूर ग्राम जोबा में रविवार की रात विश्राम किया और सोमवार की सुबह ट्रेक्टरों का ये जत्था नगर पहुंच गया जिससे ट्रेफिक जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
आदिवासी विकास परिषद भवन में आमसभा के बाद हजारों ग्रामीणों ने जिलाधीश कार्यालय का घेराव कर दिया। इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से कम्पोजिट बिल्डिंग के तीनों मेन गेट बंद कर दिये गये और पुलिस के द्वारा तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई। नगर में ट्रैफिक व्यवस्था बनाये रखने भी काफी अधिक संख्या में पुलिस बल लगाया गया था। इस दौरान कलेक्ट्रेट कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित हुआ।

ये है प्रमुख माँगे

किसान मजदूर संघर्ष समिति के द्वारा राष्ट्रपति के नाम मांगपत्र सौंपा गया है। मांगपत्र की प्रमुख मांगो में पांचवी अनुसूची पेशा कानून और ग्राम सभा कानून लागू करने, 5 वीं अनुसूची अंतर्गत ही जिले की पायलीखँड , बेहराडीह हीरा खदानों में स्थानीय मूल निवासियों को अधिकार दिलाने और इस संबंध में अर्जेंट हीयरिंग याचिका खारिज करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त लंबित व्यतिगत वन अधिकार पत्रों का त्वरित निराकरण करने की मांग की गई है। ग्रामीण किसानों के अनुसार वन अधिकार पत्रों में किसान का नाम अलग और नक्शा खसरा में अलग किसान का नाम निकलता है, जिसमे सुधार की आवश्यकता है। उदन्ती सीतानदी कोर क्षेत्रो में वनोपज संग्रहण का अधिकार, तेंदूपत्ता 500 रु प्रति सैकड़ा किया जाये , आदिवासी क्षेत्रों में विद्युतीकरण , सभी प्रकार की फसलों पर समर्थन मूल्य की गारंटी, किसानों के सरकारी व साहूकारी कर्जे माफ किये जाने , आदिवासी क्षेत्रों से सीआरपीएफ व बीएसएफ कैम्प हटाने , सीधे साधे ग्रामीणों पर माओवादी केश लगाकर डराना धमकी देना बंद किया जाये , जैसी मांगे रखी गई।

मिला सिर्फ आश्वासन

आंदोलन के प्रमुख नेतृत्वकर्ता दल ने अपनी मांगों को लेकर जिलाधीश प्रभात मल्लिक से चर्चा भी की , पश्चात कलेक्टर की ओर से एसडीएम भूपेंद्र साहू ने ग्रामीणों को आश्ववस्त करने की कोशिश की। जिला प्रशासन स्तर की मांगों पर शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया गया किन्तु शासन स्तर की मांगो जैसे तेंदूपत्ता की राशि बढ़ाये जाने या फसलों के समर्थन मूल्य की गारंटी के लिये शासन स्तर पर पत्राचार की बात कही गई। नक्सली बताकर ग्रामीणों पर कार्यवाही की मांग पर भी आश्वस्त करने के प्रयास किये गये। पेसा कानून को लेकर कलेक्टर की ओर से गरियाबंद एसडीएम भूपेंद्र साहू ने कहा कि पेशा कानून लागू है, हालांकि उनकी बात से आंदोलनकारी ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुये। संघर्ष समिति के अध्यक्ष अर्जुन नायक और जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि अधिकारी हमें झुनझुना पकड़ा रहे हैं। हम जिले के अधिकारियों के ढुलमुल रवैय्ये और निष्क्रियता से परेशान हैं , इसीलिये आज हम अपना आंदोलन समाप्त नही कर रहे बल्कि स्थगित कर रहे हैं। कुछ ही दिनों में पूरी सक्रियता के साथ पुनः कलेक्ट्रेट का घेराव किया जायेगा।

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