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गरीब आदिवासियों की इतनी ही फ़िक्र है तो पहले हसदेव के आदिवासियों को उनका हक़ दिलायें मुख्यमंत्री- युमेन्द्र कश्यप

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इन दिनो 90 विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर हैं। जिस पर युवा संघर्ष मोर्चा गरियाबंद ज़िलाध्यक्ष युमेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि- अगर मुख्यमंत्री को गरीब जनता की इतनी ही फ़िक्र है, तो पहले हसदेव के आदिवासियों को उनका हक दिलायें।

श्री कश्यप ने प्रेस वार्ता में कहा की छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार ने अंतत: हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कॉल ब्लॉक और परसा ईस्ट केते बासन ब्लॉक के विस्तार को 6 अप्रैल 2022 को आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी। बीते एक दशक से भारत के गिने चुने सघन, वन्य जीवों व जैव विविधतता से समृद्ध और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से हसदेव अरण्य में कोयला खदानों का लगातार विरोध हो रहा है। पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में शामिल इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण आदिवासी समुदायों के लिए इस जंगल के बिना अपनी ज़िंदगी की कल्पना करना भी मुश्किल है।

जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण क्षरण के इस गंभीर चुनौती भरे दौर में हसदेव अरण्य जैसे जंगल को जिसे मध्य भारत के फेफड़े कहा जाता है, कॉर्पोरेट के मुनाफे के लिए तबाह किया जाना किसी भी तर्क से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

बीते एक दशक से स्थानीय ग्राम सभाओं के संगठन हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने इस अमूल्य जंगल को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं।

श्री कश्यप ने अपनी बातों में आगे कहा- 2016 में राहुल गांधी ने हसदेव अरण्य में वादा किया था कि अगर उनकी सरकार इस प्रदेश में बनती है तो वो इस जंगल को किसी भी कीमत पर उजड़ने नहीं देंगे। आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को दरकिनार करके और पर्यावरण की चिंताओं को धता बताते हुए इसे आगे बढ़ाया जा रहा है.”

आदिवासियों की अपील के बावजूद चुप हैं राहुल गांधी। हसदेव अरण्य में रह रहे आदिवासियों के लिये यह जंगल उनका जीवन है। पिछले साल करीब 500 आदिवासियों ने हसदेव अरण्य में पेड़ों के कटाई के खिलाफ रायपुर तक करीब 300 किलोमीटर पैदल मार्च किया था. इसके बाद दिल्ली जाकर इन लोगों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी।

विधानसभा चुनावों से पहले राहुल गांधी ने खुद मदनपुर जाकर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में ग्रामीणों से कहा था कि हसदेव अरण्य को उजड़ने नहीं दिया जायेगा क्योंकि अगर जंगल है तभी आदिवासियों का वजूद हैं। साल 2011 में हसदेव में पहली बार माइनिंग खोली गई थी जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी।

विधानसभा क्षेत्रों के भ्रमण पर है। वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तब विपक्ष में रहते माइनिंग किये जाने और अडानी को एमडीओ दिये जाने का विरोध किया था। लेकिन 2018 में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बनते ही 2019 में अडानी के साथ अनुबंध कर लिया। एक तरफ़ हसदेव के आदिवासी जंगल को बचाने डटे हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री दौरा कर रहे हैं। जनहितैषी मुख्यमंत्री को गरीब आदिवासियों की इतनी ही फ़िक्र है तो पहले हसदेव के आदिवासियों को उनका हक़ दिलायें, उनकी समस्याओं का समाधान करें।

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