आलम ये है कि एक स्थानीय वाट्सअप ग्रुप में खुद पालिका अध्यक्ष गफ़्फ़ु मेमन को भी लिखना पड़ा था कि गरियाबंद का रजिस्ट्री डायवर्सन सब बंद है इसके लिये बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा , गरियाबंद में बंद बाक़ी जगह चालू है।
किरीट भाई ठक्कर , गरियाबंद। पिछले एक वर्ष से भी अधिक अर्से से नगर एवं आस पास के लगभग पांच गांवों की रजिस्ट्री नही हो पा रही है। अधिकारी इस मामले में कोई समुचित जवाब नहीं दे रहे हैं। जिले के उप पंजीयक एसके भंडारी इस मामले में अपनी टेबल पर चस्पा एक कागज का पुर्जा दिखाते हैं जिसमें दर्ज लगभग 100 खसरा नंबरों की रजिस्ट्री नही किया जाना बताते हैं।
आखिर ये आदेश किसका है पूछने पर एसडीएम से बात करने को कहते हैं। वही दूसरी ओर एसडीएम भूपेंद्र साहू का कहना है कि पूरे देश में रजिस्ट्री कही बंद नही है।
इधर मीडिया कर्मियों ने ये जानने की कोशिश की, कि आखिर जिस कागज के पुर्जे का हवाला देकर इस जिला मुख्यालय में रजिस्ट्री और डायवर्सन पिछले एक वर्ष से भी अधिक अर्से से बंद रखा गया है , जिसकी वजह से स्थानीय जनता हलकान हो रही है , साथ ही सरकार को राजस्व नही मिल रहा है, उसमें लिखा क्या है और आदेश किसका है ? हमें मिली जानकारी के अनुसार, सम्भवतः ये पुर्जा पूर्व प्रशिक्षु आईएएस एसडीएम विश्वदीप द्वारा जारी किया गया है। इसमें नगर निवेश को लेकर आस पास के गांव मजरकट्टा, आमदी ( म ) डोंगरीगांव आदि के खसरा नंबरों का उल्लेख किया गया है और कुछ संभावनायें व्यक्त की गई है।
अधिकारियों की ईन संभावनाओं का खामियाजा वर्तमान भुगत रहा है। सोशल मीडिया पर इस अघोषित मनमानी के विरुद्ध स्थानीय लोग अब कमेंट पास कर रहे हैं , और सवाल भी उठा रहे हैं। विगत दिनों सोशल मीडिया पर एक स्थानीय व्यक्ति ने लिखा कि ,जन प्रतिनिधियों की उदासीनता और अफसरों की तानाशाही के चलते गरियाबंद में हालात धारा 370 से भी बदतर हो चुके है। यहाँ बाहर के लोगो के लिये तो छोड़िये लोकल लोगों के लिये भी जमीन बेचना और खरीदना मुश्किल ही नही नामुमकिन हो चुका है। अगर आपको 5 ,10 डिसमिल जमीन मकान बनाने या दूसरे किसी काम के लिये लेना हो तो आप भूल ही जाइये हद तो तब हो गयी जब यहाँ एक भाई यदि दूसरे भाई को जमीन दे कर हक़ त्याग करना चाहे तो भी नही हो पा रहा है, और ये स्तिथि अभी निर्मित नही हुई है बल्कि साल भर से ऊपर होने को आ गया। अभी तक कोई भी विरोध के स्वर देखने को नही मिले है जबकि तकलीफ सभी को है।
इतनी गंभीर हालत छ.ग.के किसी जिले में नही , मकान बनाना सपने जैसा
सोशल मीडिया में दूसरे शब्दों में ये भी लिखा गया है कि, गरियाबंद में हालात इतने बदतर है कि यदि आपके पास पुरानी रजिस्ट्री वाली जमीन है भी तो आप डायवर्सन करा कर उसमें लोन ले कर मकान भी नही बनवा सकते। क्योंकि 2 साल से डायवर्सन भी बंद है मीडिल क्लास लोगो के लिये यहाँ घर बनाना एक सपने जैसा होता जा रहा है इतने गंभीर हालत छत्तीसगढ़ के किसी जिले में नही है।
आलम ये है कि एक स्थानीय वाट्सअप ग्रुप में खुद पालिका अध्यक्ष गफ़्फ़ु मेमन को भी लिखना पड़ा था कि गरियाबंद का रजिस्ट्री डायवर्सन सब बंद है इसके लिये बड़ा आंदोलन करना पड़ेगा , गरियाबंद में बंद बाक़ी जगह चालू है।
नगर में रजिस्ट्री और डायवर्सन के नाम पर अफसरों की घूसखोरी की चर्चा भी चरम पर है। उप पंजीयक एस के भंडारी की मनमानी भी जग जाहिर है।
