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कर्ज में डूबे कर्मचारी, वेतन भुगतान, वेतनमान वृद्धि और EPF सुविधा को लेकर 17 अगस्त को करेंगे प्रदर्शन

✍️जिला संवाददाता विक्रम कुमार नागेश गरियाबंद 

 

छत्तीसगढ़-वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों में आक्रोश है. कर्मचारियों की तीन सूत्रीय मांग के आवेदन पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई है. अब कर्मचारी संगठनों ने प्रदर्शन की चेतावनी दे दी है. कर्मचारी वेतन भुगतान, वेतनमान वृद्धि और भविष्य निधि सुविधा (EPF) की मांग कर रहे हैं. लेकिन इस पर सुनवाई नहीं होने के चलते अब संगठन 17 अगस्त को एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं. बूढ़ा तालाब धरना स्थल पर ये विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. जिला प्रशासन ने इसके लिए अनुमति भी दे दी है. छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष किरण कुमार प्रधान ने बताया कि छत्तीसगढ़ सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई को वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय से कोई आवंटन राशि प्राप्त नहीं हुई है. लेकिन इसके बाद भी उक्त वर्ष में इकाई द्वारा 8048 ग्राम पंचायतों का सामाजिक अंकेक्षण कार्य किया गया. जिसके लिए लगभग 33 हजार ग्रामीण संसाधन व्यक्तियों (मनरेगा मजदूर परिवार के सदस्य/स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं) को रोजगार प्रदान किया गया है. वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत सरकार से आवंटन प्राप्त न होने के कारण सितम्बर 2021 से मार्च 2022 तक किये गये सामाजिक अंकेक्षण कार्य में शामिल ग्रामीण संसाधन व्यक्ति को लगभग 508 लाख रुपये का भुगतान और छत्तीसगढ़ सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई के तहत कार्यरत वेतनभोगी कर्मचारियों को नवंबर 2021 से जुलाई 2022 तक करीब 315 लाख का वेतन नहीं दिया जा सका. इसलिए कुल राशि लगभग आठ करोड़ 23 लाख रुपये भुगतान के लिए लंबित है.

9 महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है. कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सामाजिक अंकेक्षण के कार्य में शामिल किया गया था. लेकिन मानदेय का भुगतान न होने से वे नाराज हैं और वे बार-बार राज्य सरकार के सामने विरोध करने की धमकी देती हैं. कार्यालय, जिससे भविष्य में कार्यालय को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने वर्ष 2018 में सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई के सभी कर्मचारियों को भविष्य निधि (EPF) की सुविधा प्रदान करने का निर्देश दिया है, लेकिन आज तक, छत्तीसगढ़ सामाजिक लेखा परीक्षा के किसी भी कर्मचारी को भविष्य निधि (EPF) की सुविधा नहीं दी गई है.

वर्ष 2014 से छत्तीसगढ़ सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई की स्थापना की तिथि तक किसी भी कर्मचारी के वेतन में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है, अनुरोध है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार कृपया राशि जारी करने और सभी कर्मचारियों को भविष्य निधि (EPF) की सुविधा प्रदान करें

छत्तीसगढ़ सामाजिक लेखा परीक्षा इकाई का गठन 2014 में भारत के राजपत्र सामाजिक लेखा परीक्षा नियम 2011 के तहत किया गया है. वर्तमान में इकाई द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 की धारा 17 के तहत सामाजिक लेखा परीक्षा का कार्य किया जा रहा है. जिसमें राज्य के महात्मा गांधी नरेगा के कुल वार्षिक बजट का 0.5 प्रतिशत सामाजिक अंकेक्षण के लिए निधि आवंटन का प्रावधान है जो पूर्णतः केन्द्रीय है.

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