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करवा चौथ का पर्व धूमधाम से मनाया, चौथ माता की पूजा कर अमर सुहाग की कामना की

✍️जिला संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद 

गरियाबंद,: देह मेरी, हल्दी तुम्हारे नाम की सिर मेरा चुनरी तुम्हारे नाम की। मांग मेरी सिंदूर तुम्हारे नाम का माथा, मेरा बिंदिया तुम्हारे नाम की। नाक मेरी नथनी तुम्हारे नाम की गला मेरा। सिर्फ पत्नी ही अपना पूरा अस्तित्व अपने पति में ढूंढती है विवाहित महिलाओं को समर्पित और सुहागिनों के लिये सबसे खूबसूरत और चर्चित इस कविता का यथार्थ महिलाओं के लोकप्रिय त्योहार करवाचौथ व्रत पूजन के साथ नजर आया। अलसुबह से ही नगर की अनेकों महिलाओं ने अपने अखंड सौभाग्य के लिये संकल्प के साथ व्रत रखा। विवाहित महिलाओं का सबसे लोकप्रिय त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी गुरुवार को मनाया गया। उत्तर भारत में खास तौर पर करवा चौथ पर्व मनाया जाता है,

लेकिन वहां की प्रेरणा से अब अन्य प्रदेशों में ग्रामीण कस्बों की महिलाए भी आस्था उत्साह और समर्पण के साथ करवाचौथ व्रत कर पर्व मनाती हैं।अपने पति की लंबी आयु की कामना और परिवार की सुख समृद्धि के लिए किया जाने वाले करवा चौथ व्रत का इंतजार हर वर्ष महिलाओं को बेसब्री से रहता है। बदलते जमाने के साथ करवा चौथ मनाने के तरीकों में बदलाव तो आया है लेकिन लोगों की आस्था आज भी उतनी ही है। बृहस्पतिवार को गरियाबंद के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं ने इस पर्व को धूमधाम से मनाया।

 

पुराना मंगल बाज़ार बजरंग चौक संतोषी मंदिर फूल चौक सिविल लाइन सुभाष चौक गौरवपथ जैसे विभिन्न इलाकों में यह पर्व पूरे उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान कई महिलाओं ने समूह में एकत्रित होकर पूजा अर्चना की। पार्को में काफी चहल-पहल देखी गई। वहीं कई इलाकों में महिलाओं ने देवी मंदिर में पूजा अर्चना कर सभी की मंगलकामना की। महिलाओं ने व्रत से संबंधित कथा सुनकर अपने बड़े बुजुर्ग का आशीर्वाद लिया। साथ ही उन्हें उपहार भी दिए गए। व्रत के बाद महिलाओं ने देर रात चांद के दर्शन किए और अपने पति के हाथों जल पीकर व्रत तोड़ा।

पुराना मंगल बाज़ार निवासी भारती सिन्हा ने बताया कि पिछले 10 वर्षो से करवा चौथ मनाती आ रही हैं। शुरुआत से लेकर आज तक इस पर्व को लेकर उत्साह एक जैसा बना हुआ है।वार्ड नम्बर 6 के स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्य कर रहीं इंद्रप्रीत कुकरेजा कहती हैं कामकाजी महिलाओं के लिए करवा चौथ मनाना थोड़ा मुश्किल जरूर है, लेकिन करवा चौथ का व्रत लेने के लिए वह छुटटी लेती हैं। वही धरमीन बाई सिन्हा का कहना है कि समय बदलने के साथ काफी बदलाव आ गया है। उनकी बेटी बाग़बाहरा में रहती है इसके बावजूद करवा चौथ के दिन कथा सुनने और पूजा करने के लिए वह ऑनलाइन होकर हमसे संपर्क करती है।

ग्रामीण इलाकों में दिखी सादगी

शहरी क्षेत्रों में करवा चौथ पर जहां बाजारों की चमक दमक छाई तो गरियाबंद के आस पास के गांवों में सादगी के साथ करवा चौथ का पर्व मनाया गया। कोकड़ी मालगांव हल्दी कोचवाय आदि के आसपास के गांवों में महिलाओं ने व्रत रखा।

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