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आचार्य युवराज पाण्डेय से दुर्व्यवहार पर राष्ट्रीय संत समागम आक्रोशित

✍️छत्तीसगढ़ 24 न्यूज़ जिला संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद 

गरियाबंद-विगत दिनों हुए छत्तीसगढ़ गरियाबंद जिला के ग्राम अमलीपदर निवासी सुप्रसिद्ध कथावाचक,परम पूज्यनीय पं.युवराज पाण्डेय के साथ हुए दुर्वव्यवहार के लिए उनके अनुयायियों एवं अनेक धार्मिक, सांस्कृतिक,सामाजिक,संस्थाओं एवं संत समागमों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है!दोषियों पर अब तक कार्यवाही नही हो पाने से यह आक्रोश चौतरफा और भी उग्र रूप धारण करने जा रहा है!उक्त घटना कि राष्ट्रीय संत सुरक्षा परिषद ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कड़ी निंदा किया है!श्री राष्ट्रीय संत सुरक्षा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष (छत्तीसगढ़ मंडल श्री महंत) के स्वामी श्री श्री उमेशानंन्द गिरी जी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि भगवताचार्य पं.युवराज पांडेय जी एक सम्मानीय सनातनी कथा वाचक है,जो छत्तीसगढ़ प्रांत के कोने-कोने में पूजे जाते हैं!ऐसे कथावाचक,साधू संतों के साथ दुर्व्यवहार करना काशी बहाल के लोगों का दुर्भाग्य है!उन्होंने ये भी कहा कि ये सिर्फ एक कथावाचक का अपमान नही बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ प्रांत के संत समागम का अपमान है!जिसे कतई बर्दाश्त नही किया जायेगा!जब आचार्य जी हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी उड़ीसा प्रांत के शिवलिंग महादेव में जल चढ़ाने जा रहे थे,इस दरमियान ओड़ीसा प्रांत के धरमगढ थाना क्षेत्र में आनेवाले काशीबहाल ग्राम के कुछ अज्ञात लोगों द्वारा उनका रास्ता रोककर दुर्व्यवहार करना अत्यंत निंदनीय है!उक्त घटना पर श्री राष्ट्रीय संत सुरक्षा परिषद ने कड़ी निंदा की है!साथ ही दुर्व्यवहार करने वाले लोगों के ऊपर शीघ्र ही उचित कार्यवाही हेतु पुलिस प्रशासन से मांग किया है!कार्यवाही नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है!बताया जाता है कि ओडिशा के ग्राम काशीबहाल में लूटपाट की घटनाएं आम बात हो गई है!और अक्सर छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ ही ऐसा व्यवहार करते हैं!मौके पर उन उपद्रवियों का विरोध करने पर गाँव के लोग भी उनके साथ होकर झगड़ा करने लगते हैं!इन सब गंभीर मामलों के बावजूद ओडिशा पुलिस प्रशासन अभी तक मौन है!जिनके लचर कानून व्यवस्था के कारण असामाजिक तत्व के लोग खुलेआम कानून को हाथ में लिए घुम रहे हैं!जबकि उन्हें ऐसे लोगों को घसीटते हुए लाकर कड़ी से कड़ी कार्यवाही करना चाहिए!काशी बहाल के बारे में यह भी सुनने में आ रहा है कि वहाँ पुलिस नही है बल्कि होमगार्ड हैं,जो समय-समय पर असामाजिक तत्वो के साथ हो लेते हैं!जिन उपद्रवियों के कारण सम्मानीय कथावाचक,साधू संतों,कांवरियों और निर्दोष राहगीरों को परेशान होना पड़ रहा है!इस मामले पर यदि पुलिस प्रशासन शीघ्र ही कार्यवाही नही करती है तो उक्त घटना के विरोध में आक्रोश चरम पर है!

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