CG24NEWS-R :- श्री राम का विवाह और राज्याभिषेक, दोनों शुभ मुहूर्त देख कर किए गए थे; फिर भी ना ही उनका वैवाहिक जीवन सफल हुआ, ना ही राज्याभिषेक, इस बारे में जब मुनि वशिष्ठ से इसका उत्तर मांगा गया, तो उन्होंने साफ कह दिया ।
“सुनहु भरत भावी प्रबल,बिलखि कहेहूं मुनिनाथ ।
हानि लाभ, जीवन मरण,यश अपयश विधि हाथ ।।”
अर्थात – जो विधि ने निर्धारित किया है, वही होकर रहेगा न राम के जीवन को बदला जा सका, ना ही कृष्ण के,ना ही महादेव शिव जी सती की मृत्यु को टाल सके, जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं का आवाहन करता है ।
ना ही गुरु अर्जुन देव जी, और ना ही गुरु तेग बहादुर साहब जी,और ना ही दश्मेश पिता गुरु गोविन्द सिंह जी, अपने साथ होने वाले विधि के विधान को टाल सके,जबकि आप सब परम समर्थवान थे ।
रामकृष्ण परमहंस भी अपने कैंसर को न टाल सके,ना ही रावण ने अपने जीवन को बदल पाया, ना ही कंस ने, जबकि दोनों के पास समस्त शक्तियाँ थी ।
मानव अपने जन्म के साथ ही जीवन-मरण, यश-अपयश, हानि-लाभ, स्वास्थ्य, बीमारी, देह, रंग, परिवार, समाज, देश-स्थान सब पहले से ही निर्धारित करके आता है ।
इसलिए सरल रहें, सहज रहें, मन, वचन और कर्म से सद्कर्म में लीन रहें ।
अपने द्वारा निर्धारित मुहूर्त में ना तो किसी का जन्म होता है ना ही किसी का मृत्यु होता है ये सब विधि के विधान के अनुसार ही होता है।
इसलिये
“जेहि विधि रखे राम तेहि विधि रहिये”
“जेहि विधि रखे श्याम तेहि विधि रहिये”
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जय जय श्री राम, जय जय श्री कृष्ण
आपका अपना शुभेच्छु
अनिल साहू (छुरा-निपानी)
अनिल साहू जी का आध्यात्मिक संपादकीय लेख “विधि का विधान अटल”
